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अगर ऐसा हुआ तो ब्रह्मोस मिसाइल की बिक्री 5 साल में हो सकती है दोगुनी

१० अक्‍तूबर, २०१७ ८:५३ पूर्वाह्न
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अगर ऐसा हुआ तो ब्रह्मोस मिसाइल की बिक्री 5 साल में हो सकती है दोगुनी

नई दिल्ली. ब्रह्मोस मिसाइल की बिक्री पांच साल में दोगुनी हो सकती है. ब्रह्मोस अंतरिक्ष परियोजना के सीईओ सुधीर कुमार मिश्रा ने यह बात कही. उन्होंने कहा कि निर्यात सिरे चढ़ा तो ब्रह्मोस मिसाइल की बिक्री पांच साल में दोगुनी हो सकती है. इंडो-रसियन संयुक्त उपक्रम की शुरुआत 1998 में हुई थी. पिछले बीस साल में सात अरब डॉलर के घरेलू आर्डर मिल चुके हैं, लेकिन अभी सबसे अहम जरूरत निर्यात सिरे चढ़ने की है.

डेफटेक-2017 (भारतीय उद्योग व रक्षा मंत्रालय के संघ) में सीईओ का कहना था कि संयुक्त मिशन के जरिये सुपरसोनिक क्रूज मिसाइलों का निर्माण किया जाता है. इन्हें पनडुब्बी, जहाज, विमान या फिर जमीन से छोड़ा जा सकता है. भारत की तीनों सेनाएं थल, नभ व जल इन मिसाइलों का इस्तेमाल कर रही हैं. अंतरराष्ट्रीय समझौतों के चलते 2016 से पहले इनका निर्यात नहीं किया जा सकता था, लेकिन एमसीटीआर (मिसाइल टेक्नोलॉजी कंट्रोल रिजाइम) में शामिल होने के बाद भारत को इनकी खरीद फरोख्त का अधिकार मिल चुका है.

सुधीर कुमार मिश्रा का कहना है कि बीस साल का सफर आसान नहीं था. कई बार पैसे की दिक्कतें थीं तो कुछ मौकों पर अन्य चुनौतियां थीं. उनका कहना है कि कंपनी लाभ की स्थिति में स्थापना के 14वें साल में आ सकी. समय के साथ ही मिसाइलों की मारक क्षमता में वृद्धि हो सकी, लेकिन यह यात्रा फलदायक थी. तीस करोड़ डॉलर खर्च करने के बाद आज हमारे पास सात करोड़ के आर्डर हैं. एमटीसीआर में जुड़ने के बाद ही वियतनाम जैसे देशों ने मिसाइल खरीद के आर्डर देने शुरू किए हैं.

स्रोत: palpalindia.com

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