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अभिमनोजः एमपी चुनावी में वोट बैंक राजनीति का नया रंग है सियासी मैराथन!

१२ अक्‍तूबर, २०१८ १२:४६ अपराह्न
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अभिमनोजः एमपी चुनावी में वोट बैंक राजनीति का नया रंग है सियासी मैराथन!

इनदिनों. मध्यप्रदेश में विधानसभा चुनाव होने जा रहे हैं और इस मौके पर पूर्व ग्वालियर रियासत की महारानी भाजपा नेत्री स्व. राजमाता विजयाराजे सिंधिया की 100वीं जयंती पर आयोजित करीब पौने चार सौ किलोमीटर की मैराथन खासी चर्चा में हैं? इधर, इस अवसर पर एमपी के मुख्यमंत्री शिवराज सिंह चौहान ने इस मैराथन को झंडी दिखाकर रवाना किया तो उधर, राजमाता के पौते ज्योतिरादित्य सिंधिया अपनी दादी के समाधि स्थल पर पुष्पांजलि अर्पित करने पहुंचे! करीब पौने चार सौ किलोमीटर की यह महिला मैराथन मुरैना, धौलपुर, आगरा, मथुरा, वृंदावन, पलवल और फरीदाबाद से होती हुई दिल्ली तक है? दिल्ली में 16 अक्टूबर को इसका समापन होगा! वहां भाजपा के राष्ट्रीय अध्यक्ष अमित शाह रिले मैराथन का स्वागत करेंगे जिसके बाद तालकटोरा स्टेडियम में एक भव्य कार्यक्रम होगा.

याद रहे, ग्वालियर क्षेत्र की तकरीबन सभी सीटों पर आज भी सिंधिया घराने का प्रभाव माना जाता है, लिहाजा विजयाराजे की जन्मशती पर पांच दिनों की रिले-मैराथन दौड़ आयोजित कर भाजपा इसी असर को वोट में बदलने की कोशिश करती नजर आ रही है? जबकि, मजेदार बात यह है कि तकरीबन एक माह पहले ही मध्य प्रदेश में भारतीय जनता पार्टी की वरिष्ठ नेता यशोधरा राजे सिंधिया ने पार्टी के समक्ष सार्वजनिक रूप से अपनी नाराजगी जाहिर की? प्रेस रिपोर्ट्स पर भरोसा करें तो भाजपा की उस विस्तारित बैठक के दौरान भारतीय जनता पार्टी की संस्थापक राजमाता विजया राजे सिंधिया की तस्वीर ना लगने से नाराज यशोधरा राजे ने बैठक का बहिष्कार कर दिया और मीटिंग के बीच ही वहां से उठकर चली गईं!

इस दौरान नेताओं के मनाने के बावजूद यशोधरा पार्टी की बैठक में वापस नहीं आईं? उल्लेखनीय है कि... भोपाल के पास बैरागढ़ में आयोजित मध्य प्रदेश भाजपा की विस्तारित बैठक में भाजपा की संस्थापक सदस्य रही विजया राजे सिंधिया की तस्वीर नहीं लगाई थी. वहां केवल श्यामा प्रसाद मुखर्जी, अटल बिहारी वाजपेयी, कुशाभाऊ ठाकरे और दीनदयाल उपाध्याय की तस्वीर ही लगाई गई थी. जब यशोधरा वहां पहुंची तो उन्होंने आयोजकों से विजयाराजे सिंधिया की तस्वीर के बारे में प्रश्न किया? इस पर पार्टी नेताओं ने कोई प्रतिक्रिया नहीं दी! इससे नाराज यशोधरा का कहना था कि- मेरी मां ने इस पार्टी के लिए अपना सबकुछ न्योछावर किया और बीमारी की हालत में भी चैबीस घंटे काम करती रहीं. उन्होंने अपने जेवर बेच कर पार्टी को खड़ा किया और अब उनकी तस्वीर तक नहीं लगाई जा रही है?

इसके बाद यशोधरा राजे बैठक छोड़कर चली गईं! एमपी की सियासत में भले ही इस वक्त सिंधिया राजघराने की पहचान ज्योतिरादित्य सिंधिया के जरिए कांग्रेस के साथ हो, लेकिन जीवाजी राव सिंधिया, राजमाता विजयाराजे, यशोधरा राजे, वसुंधरा राजे आदि जनसंघ-भाजपा के प्रभावी चेहरे हैं! वैसे तो विजयाराजे के सियासी जीवन की शुरुआत कांग्रेस के जरिए हुई थी, परन्तु कांग्रेस छोड़ने के बाद वे भाजपा के लिए समर्पित हो गई थीं? ग्वालियर क्षेत्र की अनेक सीटों पर इस घराने का असर है, इसलिए विजयाराजे की जन्मशती पर ग्वालियर से लेकर दिल्ली तक पांच दिनों की रिले-मैराथन दौड़ आयोजित कर भाजपा इसी असर को वोट में बदलने का प्रयास करती दिखाई दे रही है!

इसके जरिए भाजपा यह बताने का प्रयास कर रही है कि भाजपा शुरू से ही महिलाओं को राजनीति में महत्व देती आई है और केन्द्र की पीएम मोदी सरकार भी महिला सशक्तीकरण की अनेक योजनाएं चला रही हैं? राजनीतिक जानकारों की माने तो ग्वालियर क्षेत्र में भाजपा की पकड़ कमजोर होती जा रही है, उस पर ज्योतिरादित्य के सीएम बनने की संभावनाओं के मद्देनजर भाजपा की बेचैनी बढ़ रही है, जाहिर है- ऐसी हालत में भाजपा को विजय राजे सिंधिया के नाम का ही सहारा है! सियासी सारांश यही है कि... 21वीं सदी की सियासत में सम्मान का भी राजनीतीकरण होता जा रहा है? कितनी कामयाबी मिलेगी यह तो समय बताएगा, लेकिन एमपी चुनावी में वोट बैंक की राजनीति का एक नया रंग जरूर सामने आया है!

स्रोत: palpalindia.com

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