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अभिमनोजः हर उपचुनाव का नतीजा कुछ कहता है!

७ नवंबर, २०१८ २:१२ पूर्वाह्न
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अभिमनोजः हर उपचुनाव का नतीजा कुछ कहता है!

इनदिनों. कर्नाटक उपचुनाव की हार ने लोकसभा में भाजपा को 2014 की 282 सीटों से हटा कर कर 272 की सीमारेखा पर खड़ा कर दिया है, लेकिन आत्ममुग्ध केन्द्रीय भाजपा इन नतीजों के संकेतों को सियासी जोड़तोड़ के शोर में दबाने की ही कोशिश करती रही है! कर्नाटक में तीन लोकसभा सीटों पर हुए उपचुनाव में से भाजपा केवल एक सीट पर ही जीत दर्ज करवा सकी, जबकि दो सीटों पर उसे हार मिली. वर्ष 2014 के लोकसभा चुनाव में शानदार जीत दर्ज करवाने के बाद हुए 30 उपचुनाव में भाजपा 20 सीटें हार गई, बावजूद इसके केन्द्रीय भाजपा मोदी मैजिक के बेअसर होने की सच्चाई स्वीकार नहीं कर पा रही है?

भाजपा लगातार उपचुनावों में मात खा रही है और यदि सियासी माहौल में सुधार नहीं होता है तो भाजपा के लिए 2014 दोहराना लगभग असंभव हो जाएगा. कर्नाटक में बेल्लारी, शिमोगा सीटें भाजपा के पास थीं जबकि मांड्या सीट जेडीएस को मिली थी. जेडीएस अपनी सीट बचाने में कामयाब रही, किन्तु भाजपा अपनी बेल्लारी सीट नहीं बचा पाई. बेल्लारी लोकसभा सीट से भाजपा के वरिष्ठ नेता श्रीरामल्लू सांसद थे, परन्तु विधानसभा चुनाव जीतने के बाद उन्होंने लोकसभा सदस्यता से त्यागपत्र दे दिया था.

उपचुनाव में भाजपा ने उनकी बहन शांता को उम्मीदवार बनाया था, लेकिन वे जीत नहीं पाईं. आम चुनाव 2014 में जोरदार कामयाबी के बाद तीस लोकसभा सीटों पर उपचुनाव हुए, जिनमें से 16 सीटें भाजपा के पास थीं, किन्तु अब उनमें से केवल 6 सीटें ही बची हैं, अर्थात... 10 सीटों का घाटा. जो सीटें भाजपा के हाथ से निकल गईं वे हैं- बेल्लारी, कैराना, गोंदिया- भंडारा, फूलपुर, गोरखपुर, अलवर, अजमेर, गुरदासपुर और रतलाम. यूपी, राजस्थान और मध्यप्रदेश जैसे भाजपा प्रभावित प्रदेशों में उपचुनावों की हार भाजपा के लिए विचारणीय है. यदि इन हार के कारण तलाशने में भाजपा नाकामयाब रही तो अगले आम चुनाव में कोई रणनीति काम नहीं आएगी! क्योंकि हर उपचुनाव का नतीजा कुछ कहता है?

स्रोत: palpalindia.com

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