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आइसीआइसीआई-वीडियोकॉन केस: पीएमओ ने आरबीआई को फारॅवर्ड की थी शिकायतें

१६ अप्रैल, २०१८ २:२० पूर्वाह्न
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आइसीआइसीआई-वीडियोकॉन केस: पीएमओ ने आरबीआई को फारॅवर्ड की थी शिकायतें

मुंबई. भारतीय रिजर्व बैंक ने वीडियोकॉन समूह को आइसीआइसीआई बैंक से प्राप्त ऋण को लेकर उठाए गए औचित्य के प्रश्नों की विस्तार से जांच की थी पर उस समय उसे परस्पर लेन देन या लाभ पहुंचाने का कोई मामला नहीं दिखा था. आरबीआई के दस्तावेजों के अनुसार उसने यह जांच 2016 के मध्य में की थी. उसे प्रधानमंत्री कार्यालय ने अपने पास आयी कुछ शिकायतें फॉरवर्ड की थीं. इनमें आरोप लगाया गया था कि वीडियोकान समूह ने आइसीआइसीआइ बैंक को बड़ा कर्ज दे रखा है और आइसीआइसीआइ बैंक की मुख्य कार्यपालक अधिकारी चंदा कोचर के पति दीपक कोचर वीडियोकान के साथ मिल कर चांदी काट रहे हैं.

दस्तावेजों और मामले को सीधे जानने वाले सूत्रों के अनुसार रिजर्व बैंक ने इस मामले में जुलाई 2016 के मध्य में अपनी पहली टिप्पणी में कहा था कि आइसीआइसीआइ बैंक ने कुछ बैंकों के एक समूह के साथ मिलकर एक कर्ज समेकन योजना के तहत वीडियोकान समूह को 1,730 करोड़ रुपये का कर्ज दिया था. रिजर्व बैंक ने इसी में आगे यह भी कहा कि उसे इस मामले में हितों के द्वंद्व या टकराव का कोई मामला नहीं दिखा. पर रिजर्व बैंक ने यह टिप्पणी जरूर की थी कि दीपक कोचर की कंपनी न्यूपावर को मिले धन के कुछ स्रोतों को लेकर वह किसी निष्कर्ष पर नहीं पहुंच पाया है. रिजर्व बैंक ने कहा था कि न्यूपावर के सादौं की वैधता की पुष्टि के लिए उसे मिले धन के स्रोतों की जानकारी जरूरी है और यह काम जांच एजेंसियां ही कर सकती हैं. बाद में उसी साल दिसंबर में आरबीआइ ने वीडियोकान को आइसीआइसीआइ बैंक से 2007-12 के दौर मिले कर्ज के बदले लेनदेन के आरोपों पर विस्तार से टिप्पणी में कहा था कि यह बैंक वीडियोकान समूह के नाम 20,195 करोड़ रुपए के कर्ज के एक समेकन कार्यक्रम में शामिल था और उसमें इस बैंक का हिस्सा 1,750 करोड़ रुपए का था. इस कार्यक्रम में कई बैंक शामिल थे और बैंकों के इस समूह का नेतृत्व भारतीय स्टेट बैंक कर रहा था. रिजर्व बैंक ने कहा था कि चूंकि इस कर्ज समेकन कार्यक्रम में अन्य बैंकों की तरह ही आइसीआइसीआइ बैंक भी हिस्सा ले रहा था इसलिए ‘लेन देन ' के आरोप की पुष्टि नहीं की जा सकती. रिजर्व बैंक ने कहा था कि न्यूपावर रीन्यूएबल्स लि. के स्वामित्व के हस्तांतरण का विषय इस बैंक के अधिकार क्षेत्र से बाहर का था. यह कंपनी दीपक कोचर ने वीडियोकान के प्रवर्तक धूत परिवार के साथ मिल कर दिसंबर 2008 में बनायी थी.

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स्रोत: palpalindia.com

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