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इतनी लचर और निराधार नहीं है वायर की खबर.

१० अक्‍तूबर, २०१७ ५:१८ पूर्वाह्न
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इतनी लचर और निराधार नहीं है वायर की खबर.

खबर में कहा गया है, “शाह के वकील का कहना है कि ‘2.1 मेगावाट के पवन ऊर्जा संयंत्र को स्थापित करने के लिए आईआरईडीए से लिया गया कर्ज उस समय इंडस्ट्री मानकों के हिसाब से उपकरणों की कीमत (करीब 14.3 करोड़) पर आधारित है। इसकी बाकायदा समीक्षा की गई थी और साधारण व्यापार के तहत इसे उपलब्ध कराया गया था। 30-06-17 को कुल बकाया कर्ज 8.52 करोड़ है और ब्याज और कर्ज की पुनर्अदायगी नियमित तौर पर की जा रही है।”

इसी खबर में आगे कहा गया है, “जो बात स्पष्ट नहीं होती, वह है वह मानक, जिसके आधार पर एक पार्टनरशिप, जिसका मुख्य कारोबार, शाह के वकील के मुताबिक, ‘स्टॉकों और शेयरों की ट्रेडिंग, आयात-निर्यात गतिविधियां और डिस्ट्रीब्यूशन और मार्केटिंग कंसल्टेंसी सर्विसेज है, 2.1 मेगावाट की पवन ऊर्जा परियोजना के लिए आवदेन करने का फैसला किया और उसे इसके लिए कर्ज भी मिल गया, जबकि उसके पास बुनियादी ढांचा या बिजली क्षेत्र का कोई पूर्व अनुभव नहीं था। कर्ज देने की नीति के बारे में जानकारी लेने के लिए ‘द वायर’ ने आईआरईडीए से भी संपर्क साधा है और इसका जवाब आने पर इसे रिपोर्ट में शामिल किया जाएगा।”

दि वायर ने यह जवाब अभी तक साझा नहीं किया है। इसलिए मानकर चल रहा हूं कि कंपनी ने कोई जवाब नहीं दिया है। मेरा सवाल यहीं है, जय शाह का मामला तो चलो अदालत में है पर सार्वजनिक क्षेत्र के उद्यम- इंडियन रिन्यूएबल एनर्जी डेवलपमेंट एजेंसी ने किसी को कर्ज किन शर्तों पर दिए यह जानने और पूछने का हक क्या आम आदमी को नहीं है? वह भी तब जब कंपनी पहली नजर में इस क्षेत्र में काम करने वाली नहीं है और उसे इस क्षेत्र का अनुभव हो ऐसा कुछ नजर नहीं आ रहा है। पीयूष गोयल अगर शाह का बचाव और खबर की निन्दा नहीं कर रहे होते तो यह माना जा सकता था कि उन्हें यह सब मालूम ही नहीं है। पर जब वे जय शाह का बचाव कर रहे हैं तो उस कंपनी का बचाव क्यों नहीं कर रहे हैं जो उनके या उनके मंत्रालय के अधीन थी?

यह भी मान लूं कि पीयूष गोयल कंपनी का बचाव करें या उसकी ओर से बोलें तो यह अपना बचाव करना लग सकता है। तब क्या मौजूदा मंत्री श्री आरके सिंह को इस संबंध में स्पष्टीकरण नहीं देना चाहिए। या कंपनी से पूछताछ नहीं करनी चाहिए। इतनी चर्चित खबर में मंत्रालय का नाम है, उसके कर्ज देने की नीति पर सवाल है – तब भी जवाब देने की जरूरत ही नहीं है? जैसा कि ऊपर लिख चुका हूं, मूल खबर में ही कहा गया है कि कंपनी का जवाब छापा जाएगा और अभी तक जवाब नहीं है मतलब कुछ तो गड़बड़ है। भक्तों को नहीं दिख रहा। भक्त के रूप में आपको भी नहीं दिखेगा पर आप मंत्री भी तो हैं। मंत्री के रूप में आपकी जवाबदेही का क्या हुआ?

मैं टेलीविजन नहीं के बराबर देखता हूं। इसलिए पता नहीं है कि अमित शाह के बेटे जय शाह से संबंधित वायर की खबर को टेलीविजन पर कैसे दिखाया गया। अखबारों में तो खबर की चर्चा न के बराबर है। सोशल मीडिया पर भक्त पत्रकार कह रहे हैं कि खबर बदनाम करने की कोशिश है और कुछ भक्तों ने तो बाकायदा उन वायर सेवाओं के लिंक भेजे हैं जो बताते हैं कि वायर की स्टोरी कैसे खबर ही नहीं है। आदि। इसके बावजूद जय शाह ने एलान किया है कि, “अगर कोई भी इस बताये गये लेख में लगाये गए इल्ज़ामों को दोबारा प्रत्यक्ष या अप्रत्यक्ष रूप से प्रकाशित/प्रसारित करता है तो वह व्यक्ति/संस्थान भी इसी अपराध/ सिविल लायबिलिटी का दोषी होगा।”

स्रोत: mediadarbar.com

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