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क्रशर मालिक की नजर में उसके हाथ की कीमत सिर्फ 40 हजार

१६ मई, २०१८ ७:११ पूर्वाह्न
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क्रशर मालिक की नजर में उसके हाथ की कीमत सिर्फ 40 हजार

Ranchi : काम कर के बूढ़ी मां और भाई की जिम्मेदारी उठाना शुरू किया ही था कि अब उन पर बोझ बन गयी हू़ं. यह कहते हुए उसकी दोनों आंखों से आंसू टपटपा कर टूटे हुए घर के मिटटी के फर्श पर गिरने लगे. यह कहानी एक ऐसी बेटी की है, जो मेहनत कर अपने भाई को पढ़ाना चाहती थी. बूढ़ी मां को सहारा देना चहती थी, लेकिन यह सपना पूरा नहीं हो सका. आज अपने दोनों हाथ गवां चुकी बरती कुमारी गांव में खुले क्रशर में अपने दोनों हाथ गंवाने के बाद परिवार पर खुद को बोझ मानने लगी है. घटना के दिन को याद करते हुए बरती ने बतायाः वह एके स्टोन कंपनी के क्रशर में काम कर रही थी. अचानक वहां पर बड़े-बडे पत्थल उड़े. फिर जब आंख खुली तो खुद को अस्पताल के बिस्तर में पड़ा पाया. मेरे दोनों हाथ काट दिये गये थे. शरीर में भी काफी गंभीर चोट लगी थी. 14 दिन अस्पताल में रहने के बाद खुद के हाथ गंवा कर घर लौटी.

बरती कुमारी बताती है कि जब अस्पताल से अपना घर वापस लौटी, तो क्रशर मालिक मेरे घर आकर बैंक में खाता खोलने का फॉर्म भर कर मेरे पैर के अंगूठे का निशान ले गया. क्रशर मालिक ने कहा था कि तुम्हारे नाम से बैंक में हर माह पैसा जमा कर दिया जायेगा, जिससे तुम्हारा गुजर-बसर हो जायेगा. लेकिन आज तक हमें यह भी नहीं पता कि बैंक खाता खुला है या नहीं. घटना के 20 महीने बाद भी पास बुक नहीं मिला. मार्च 2017 के बाद से जो दो हजार रुपया खर्च के लिए दिया जा रहा था, वह भी बंद कर दिया गया है. अब तो परिवार के सामने जीने का संकट आ गया है. मां किसी तरह से मेरा बोझ उठा रही है. फिर आगे क्या होगा. यह कह नहीं सकते. क्रशर मालिक की ओर से अब तक 21 महीना में करीब 40 हजार रूपये दिये गये हैं.

बलराम बिझिया की पत्नी ने बताया कि क्रशर खादान में काम करने के दौरान हुए विस्फोट में घायलों का सही ढंग से इलाज नहीं करवाया गया है. खादान में काम करते हुए मेरे पति का पैर टूटा था. जिसका रिम्स में इलाज कराया गया. लेकिन अभी तक मेरे पति के पैर की हड्डी नहीं जुटी है. अब वह खेती-बारी करने में भी असमर्थ है. काम के दौरान हुई दुर्घटना का हम लोगों को किसी तरह का कोई मुआवजा नहीं मिला.

कंपनी के मालिक की ओर से बरती कुमारी के खाते में दो लाख रूपया जमा करने की बात कही जा रही है, लेकिन बरती को अभी तक पासबुक भी नहीं मिला है. घटना में गांव के दो लोगों को गंभीर चोट आयी थी. अब वह लोग किसी भी तरह का काम करने में असमर्थ है. बरती को त्योहार के समय में कुछ पैसा दिया जाता है. अब उसे दो हजार रूपया प्रतिमाह नहीं दिया जा रहा है. हरदाग टांगरटोली में तीन क्रशर खुले हैं, जिसमें मात्र तीन लोग ही एेसे हैं, जो स्थानीय हैं और काम कर रहे हैं. बाकी सभी बाहर के लोग काम कर रहे हैं.

बरती कुमारी को कर रहें हैं आर्थिक सहयोगः जगरनाथ प्रजापति (एके स्टोन कंपनी का मालिक)

स्रोत: newswing.com

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