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चुनावी चकल्लस... भैयाजी तो हो गये माता रानी की भक्ति में लीन..!

१० अक्‍तूबर, २०१८ ९:०० पूर्वाह्न
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चुनावी चकल्लस... भैयाजी तो हो गये माता रानी की भक्ति में लीन..!

जबलपुर. चुनाव के ऐन वक्त पर नवरात्रि का पर्व, सो माहौल धर्ममय हो चुका है. सुबह से देर शाम तक माता-भक्ति में नेताजी भी लीन हो चुके हैं. वे हर दरबार में हाजिरी लगाने से नहीं चूक रहे हैं, जहां पर मातारानी के आशीर्वाद के साथ लोकतंत्र के सबसे बड़े भगवान जनता-जनार्दन से रूबरू होने का जो मौका मिल रहा है. टिकट के दावेदार हों या वर्तमान विधायक जिन्हें पूरी उम्मीद है कि चुनावी टिकट उन्हें ही मिलेगी, वे काफी सुबह से ही उठ गये, उन्होंने अपनी दिनचर्या में बदलाव नवरात्रि के पहले ही दिन से कर दिया है, ताकि पूरे 9 दिनों में यह उनकी आदत बन जायेगी, क्योंकि आने वाले दिन में उन्हें प्रचार-प्रसार में काफी वक्त लगाना होगा, इसलिए अभी से आदत डाल लेना जरूरी है.

शहर के नामी-गिरामी हड्डी रोग के माहिर डॉक्टर साहब का नाम भी टिकट के दावेदारों में सबसे ऊपर आ गया है, तब से कुछ लोगों की टेंशन काफी बढ़ गई है. जबलपुर शहर के हृदय स्थल वाली विधानसभा सीट से तो भाजपा की टिकट के कई दावेदार हैें, लेकिन सबसे बड़ा दावा तो वर्तमान नेताजी का ही है, लेकिन पिछले कुछ दिनों से राजनीतिक क्षेत्रों में यह बात बार-बार सामने आ रही है कि आरएसएस में काफी दखल रखने वाले एक डॉक्टर साहब भी चाहते हैं कि वे अब मरीजों की टूटी-फूटी हड्डियों का उपचार करने की बजाय सीधे जनता की समस्याओं का उपचार करें. अब जब डॉक्टर साहब का नाम सामने आया तो सभी दावेदारों की सिट्टी-पिट्टी गुम हो गई है, इन लोगों के डाक्टर साहब से इतने मधुर संबंध हैं कि वे उनसे यह कह भी नहीं सकते कि आप अपनी दावेदारी छोड़ दो, सो बात टेंशन की तो होगी ही न. अब देखना यह है कि चुनाव मैदान में उतरने के पहले टिकट पाने की दौड़ में कौन सफल होता है.

शहर के एक युवा, ऊर्जावान विधायक के निवास या कहें, जहां उनका राज-दरबार सजता है, वहां से पकवानों की भीनी-भीनी सुगंध पिछले कुछ दिनोंं से आने लगी है. सुबह से लेकर देर रात तक खान-पान का दौर चल रहा है. पार्टी कार्यकर्ताओं के साथ-साथ क्षेत्र की जनता भी इस स्वादिष्ट, लजीज पकवानों का लुत्फ उठाने पहुंच रही है. खास बात यह है कि नवरात्रि शुरू हो गई है, सो इन दिनों उपवास रखने वालों के लिए भी विशेष इंतजाम है. इन नेताजी की इस व्यवस्था के चर्चे पूरे क्षेत्र में फैल चुके हैं. पिछले चुनाव में मामूली अंतर से पराजित प्रत्याशी व उनकी पार्टी तक इस लंगर की सूचना पहुंच चुकी है, लेकिन मजबूरी है कि वे इसमें कुछ कर नहीं सकते. वैसे वे विशेषज्ञों से पता करा रहे हैं कि भोजन कराना क्या आचार संहिता के उल्लंघन में आता है कि नहीं. अब इस मामले में कुछ हो न हो, लेकिन अगले डेढ़ से दो माह तक लोगों को छककर पकवानों का सुख तो मिलेगा ही.

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स्रोत: palpalindia.com

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