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चुनावी चकल्लस..यहां की जनता तो ना समझ ही है

१८ नवंबर, २०१८ १२:५२ अपराह्न
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चुनावी चकल्लस..यहां की जनता तो ना समझ ही है

पलपल संवाददाता, जबलपुर. हर तरफ मतदान को लेकर संकल्प, कार्यक्रम, मानव श्रृंखला बनाई जा रही है, स्कूल से लेकर कालेज तक और कालेज से लेकर थर्ड जेंडर तक हर किसी को मतदान के लिए जागरुक किया जाना अब चर्चा का विषय बन चुका है. इस अभियान को लेकर अब आम आदमी यह कहने के लिए मजबूर हो गया है कि काए भईया जबलपुर की जनता बिलकुल ना समझ ही है, इसके पहले जबलपुर में चुनाव नहीं हुए लोगों ने वोट नही डाले है क्या. जो जागरुकता अभियान के नाम पर लाखों रुपए की होली खेली जा रही है, खैर अपन को क्या करना यह तो जनमानस के बीच होने वाली चर्चाओं से यह बात छनकर बाहर आई है, विधानसभा चुनाव में पहले भी जबलपुर में मतदान हुआ है और लोगों ने घरों से निकलकर लोकतंत्र के महायज्ञ हिस्सा लिया है.

डेंगू, चिकनगुनिया, लंगड़ा बुखार की चपेट में आकर शहर के लोग कराह उठे, इन बीमारियों की चपेट में आकर लोग अस्पतालों में भरती हो गए, जिससे अस्पताल फुल रहे, यहां तक कि लोगों को अस्पतालों में जगह तक नहीं मिल रही थी, उस वक्त न तो नगर निगम ने मच्छर मारने व शहर की सफाई व्यवस्था पर ध्यान दिया, लेकिन ऐन चुनाव के मौके पर अचानक नगर निगम को शहर की सफाई व्यवस्था, मच्छरों की फौज दिखाई देने लगी है, इन दिनों अभियान चलाकर फॉगिंग मशीन चलाई जा रही है, देर रात मशीनों से शहर में झाड़ू लगाई जा रही है. नगर निगम की सक्रियता को देखकर अब लोग यही कह रहे है कि अब सफाई, स्वच्छता व मच्छर दिख रहे है, इसके पहले मच्छर नहीं थे क्या.

एक तरफ नेताजी लोगों द्वारा धुआंधार जनसंपर्क किया जा रहा है, सुबह से देर शाम तक प्रत्याशी घर घर पहुंचकर लोगों से अपने समर्थन में वोट मांग रहे है, हाथ, जोड़ रहे है, बुजुर्गो का आशीर्वाद पाने के लिए चरण वंदना कर रहे है, इसके बाद जैसे ही अपने केंद्रीय कार्यालय में पहुंचते है तो सलाहकारों की भीड़ पहुंच जाती है जो देर रात तक नेताजी के कानों तक अपनी आवाज पहुंचाने के लिए आतुर दिखाई देती है. अब देखिए न नेताजी लोगों की मजबूरी इनक ी बातों को भी सुनना पड़ रहा है, उसके बाद अमल भी किया जा रहा है. खैर अभी तो मजबूरी भी सबकी बात सुनना, समझना और आश्वासन देना, बाद में देखेगे कि क्या करना है क्या नहीं करना.

कांग्रेस की एक जुटता इस बार के चुनाव में आमजन के बीच चर्चा का विषय बनी हुई है, हर विधानसभा में कांग्रेस के नेता, कार्यकर्ता अपने प्रत्याशी को जिताने के लिए दिन रात से जुटे हुए है, चलो अच्छी बात है पहली बार ऐसी एकजुटता दिखाई दे रही है, इसका लाभ भी आने वाले दिनों में देखने को मिलेगा, लेकिन इन सारी बातों के बीच यह बात तो आम आदमी की समझ से परे है कि कुछ नेताजी लोग टिकट न मिलने से ऐसे नाराज है कि वे अपनी विधानसभा क्षेत्र में घूमने के बजाय दूसरे के विधानसभा में जाकर मंत्र दे रहे है, यह नजारा केंट क्षेत्र के नेताओं को देखकर ही लगाया जा सकता है जो दूसरे विधानसभा में डेरा डाले हुए है, जहां पर प्रत्याशियों के साथ बैठकर अपने अनुभवों को शेयर कर रहे है, यह बात अलहदा है कि ज्ञान देने वाले नेताजी लोग स्वयं कभी चुनाव नहीं जीत पाए है.

स्रोत: palpalindia.com

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