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छोटे शहर के युवा भी फैशन की दुनिया में बना सकते हैं पहचान

१४ सितंबर, २०१७ ५:५८ पूर्वाह्न
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भोजपुरी फिल्म तोर बिना फेम कुणाल भारती के अनुसार इस क्षेत्र में हुनर मायने रखता है, न की शहर. यदि आपमें टैलेंट है तो बड़े शहरों के डिजाइनर्स औऱ मॉडल्स को मात देके अपनी जगह बना सकते है.। यह धारणा कि छोटे शहर के लोगों में टैलेंट की कमी है तो यह सही नहीं. कमी टैलेंट की नहीं मंच की है. बडिंग आर्टिस्ट को मौका नहीं मिल पाता, लेकिन सरकार की फिल्म निति ऐसे आर्टिस्ट के लिए वरदान साबित हो रही.

2009 से फैशन और ग्लेमर की दुनिया में रह रहे कुणाल को पहली उपलब्धी 2012 में मिली. नेशनल लेवल फैशन शो में मिस्टर ड्रीम्ज का खिताब हासिल करत. इसके बाद उन्हें कई भोजीपुरी और नागपुरी में काम करने का मौका मिला. उनकी फिल्म तोर बिना रांची के सिनेमाघरों में ही नहीं बंगाल में भी लोकप्रिय रही. कुणाल का मानना है कि जीवन है तो संघर्ष तो होगा ही. पर आगे वही बढ़ते हैं जिनमें टैलेंट होता है.

आईआईएफटी की अनामिका सिंह का कहना है कि इस फिल्ड में स्कोप की कमी नहीं है. स्टूडेंट्स में जानकारी का अभाव है. वह फैशन को दो ही ढ़ंग से जानते हैं, या तो फैशन डिजाइनिंग या मॉडलिंग. लोग इस फिल्ड के अन्य अंगों से अनजान है. उन्होंने कहा कि ग्लैमर की दुनिया में भ्रमित करने वालों की कमी नहीं है. इसलिए यह जरूरी है कि स्टूडेंट्स अपना लक्ष्य तय कर काम करें. बाकी सब्जेकट्स की तरह इस विषय में भी थ्योरी जरूरी है. बिना बेस क्लियर हुए स्टूडेंट अपनी मंजिल तक नहीं पहुंच सकते हैं.

अनामिका सिंह ने कहा कि स्टूडेंट की हार वहीं हो जाती है, जहां वह खुद को दूसरे से कम आंकना शुरू कर देते हैं. छोटे शहरों के स्टूडेंट्स में कंफीडेंस की कमी होती है क्योंकि विषय को लेकर उनका कंसेप्ट क्लियर नहीं होता है. इसलिए यह आवश्यक है कि फील्ड में कदम रखने से पहले यह जरूरी है आपको विषय की पूर्णरूप से जानकारी हो.

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स्रोत: newswing.com

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