NewsHub के साथ गर्मागर्म विषयों पर ताज़ातरीन ख़बरों के अपडेट प्राप्त करें। अभी इन्स्टाल करें।

जब महिला जज ने कहा, पीड़ित पुरुषों को क्यों नहीं कह सकते 'रेप केस सरवाइवर'

६ दिसंबर, २०१७ ३:०५ अपराह्न
2 0
जब महिला जज ने कहा, पीड़ित पुरुषों को क्यों नहीं कह सकते 'रेप केस सरवाइवर'

नई दिल्ली [स्पेशल डेस्क] । दिल्ली की एक अदालत ने एक शख्स को दुष्कर्म के आरोप से मुक्त करते हुए न केवल यह कहा कि उसे रेप केस सरवाइवर क्यों नहीं कह सकते, बल्कि यह भी टिप्पणी की कि आखिर पुरुषों के मान-सम्मान की बात कौन करेगा, क्योंकि महिलाओं की मान- मर्यादा की रक्षा के लिए तो तमाम कानून बने हैं, लेकिन पुरुषों के सम्मान और मर्यादा की रक्षा के लिए कानून कहां हैं? शायद अब समय आ गया है जब पुरुषों के अधिकारों के प्रति भी बात होनी चाहिए'। खास बात यह है कि ये टिप्पणियां एक महिला जज ने कीं। यह महिला जज तीस हजारी कोर्ट की ए़डिशनल सेशंस जज निवेदिता अनिल शर्मा हैं। उन्होंने इस केस का निपटारा करते हुए कहा कि जब कोई महिला दुष्कर्म की शिकार होती है तो हम उसे रेप सरवाइवर कहते हैं और उसे इसी तौर पर देखते हैं, लेकिन इसका दूसरा पक्ष भी है। जब कोई अभियुक्त दुष्कर्म के आरोप से अदालत से बाइज्जत बरी हो जाता है तो हम उसे रेप केस सरवाइवर क्यों नहीं कहते?

-पुरुषों के मान-सम्मान की बात कौन करेगा? आरोप से मुक्त शख्स रेप केस सरवाइवर क्यों नहीं?

उन्होंने आरोपी को दोषमुक्त करते हुए कहा कि इस तथ्य को कैसे नजरंदाज किया जा सकता है कि लड़की की शिकायत और इस शिकायत के कारण आरोपी के जेल जाने से उसकी सामाजिक प्रतिष्ठा धूमिल नहीं हुई होगी? वह न जाने कितने उलाहनों को सहता रहा होगा और सच्चाई यह भी है कि दोषमुक्त हो जाने के बाद भी उसके प्रति लोगों का नजरिया पहले की तरह सकारात्मक नहीं होगा। उन्होंने यह भी सवाल उठाया कि आखिर ऐसे कानून कहां हैं जो इस मामले की तरह पुरुषों को रेप के झूठे आरोप लगाने वाली महिलाओं से बचा सकें?

यह भी पढ़ें: अंतर्राष्ट्रीय हॉकी महासंघ ने घोषित की महिला और पुरुष वर्ग की रैंकिंग

स्रोत: jagran.com

सामाजिक नेटवर्क में शेयर:

टिप्पणियां - 0