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... तो इसलिए आरईओ से हटाये गये आइएएस अविनाश कुमार

१४ मई, २०१८ ४:३६ पूर्वाह्न
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... तो इसलिए आरईओ से हटाये गये आइएएस अविनाश कुमार

Ranchi: नौ मई की देर शाम सरकार के कार्मिक एवं प्रशासनिक सुधार विभाग ने एक अधिसूचना जारी की. जारी अधिसूचना के अनुसार ग्रामीण विकास विभाग (ग्रामीण कार्य मामले) यानी की आरइओ के प्रधान सचिव अविनाश कुमार का तबादला ग्रामीण विकास विभाग के प्रधान सचिव के पद पर किया गया था. उनके स्थान पर किसी अधिकारी का पदस्थापन नहीं किया गया. बल्कि पेयजल एवं स्वच्छता विभाग के सचिव आराधना पटनायक को आरइओ के सचिव पद का अतिरिक्त प्रभार दिया गया.

इस अधिसूचना के जारी होते ही ब्यूरोक्रेसी में तरह-तरह की चर्चाएं शुरु हो गयी. किसी को समझ में नहीं आ रहा था कि सत्ता शीर्ष पर मजबूत पकड़ रखने वाले अविनाश कुमार का तबादला अचानक से कैसे हो गया. चर्चा की एक बड़ी वजह यह भी थी कि अविनाश कुमार के तबादले को लेकर पहले से कहीं कोई विचार-विमर्श नहीं किया गया. उनका तबादला भी वैसे पद पर किया गया, जिस पद के अतिरिक्त प्रभार में वह पहले से थे.

अब जनिये, तबादले की असली वजह. तबादले की असली वजह थे चर्चित इंजीनियर पारस कुमार. पारस कुमार वही इंजीनियर हैं, जो अब तक तीन बार बर्खास्त हो चुके हैं. सुप्रीम कोर्ट से आदेश आने के बाद ही अभी वह सेवा में हैं. झारखंड ही नहीं एकीकृत बिहार के समय से वह चर्चित रहे हैं. भ्रष्टाचार के तमाम आरोप उन पर लगते रहे हैं. 27 अप्रैल को ग्रामीण विकास विभाग (ग्रामीण कार्य मामले) ने इसी चर्चित इंजीनियर पारस कुमार को विभाग को मुख्य अभियंता बना दिया. वह भी सिर्फ कार्यालय आदेश जारी करके.

सरकार के उप सचिव नंद कुमार ठाकुर के हस्ताक्षर से जारी कार्यालय आदेश में पारस कुमार को मुख्य अभियंता का कार्य करने के लिए प्राधिकृत किया गया था और इंजीनियर मुरारी भगत को जेएसआरआरडीए के मुख्य अभियंता का कार्य करने का आदेश दिया गया था. आदेश पर विभाग के प्रधान सचिव, यानी अविनाश कुमार का अनुमोदन प्राप्त होने की बात भी अंकित है. सत्ता शीर्ष से मिली जानकारी के मुताबिक इस कार्यालय आदेश की जानकारी मिलने के बाद मुख्यमंत्री के निर्देश पर तत्काल अविनाश कुमार का तबादला कर दिया गया.

जानकारी के मुताबिक, मुख्य अभियंता के पद पर किसी इंजीनियर की नियुक्ति के लिए सरकार अधिसूचना जारी करती है. एेसे मामलों में मुख्यमंत्री कार्यालय की स्वीकृति भी जरुरी होती है. कार्यालय आदेश के तहत कोई भी विभाग या अधिकारी सिर्फ कार्यालय के कामों का आवंटन ही कर सकते हैं. इस तरह पारस कुमार को मुख्य अभियंता का काम सौंपने को सरकार के अधिकार को चुनौती देना भी माना गया.

स्रोत: newswing.com

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