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दो दलों को मिलवाने में इनकी भूमिका रही खास

१६ मई, २०१८ १:२२ अपराह्न
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दो दलों को मिलवाने में इनकी भूमिका रही खास

नई दिल्ली. कर्नाटक विधानसभा चुनाव 2018 के परिणाम आ गए हैं. इस चुनाव में किसी भी दल को स्पष्ट बहुमत नहीं मिला है. बीजेपी 104 सीटें मिली हैं, वहीं कांग्रेस को 78 सीटों से संतोष करना पड़ा है. जेडीएस इस चुनाव में किंग बनकर उभरी है. हालांकि उसे सिर्फ 37 सीटें ही मिली हैं. एक सीट मायावती की बसपा को गई है, जबकि दो सीटें निर्दलीय ले गए हैं.

किसी राजनीतिक पार्टी को बहुमत न मिलने पर अकेले दम पर सरकार बनाना मुश्किल है. अब गेंद राज्यपाल के पाले में है. परिणाम आने के बाद कांग्रेस और जेडीएस को साथ लाने में मुख्य भूमिका मायावती की थी जिन्होंने सबसे पहले इस दिशा में प्रयास कर दो दलों के नेताओं को मिलवाया और फिर कुछ ही देर में सब राजी हो गए.

सूत्रों के मुताबिक मायावती ने ही सोनिया और जेडीएस के मुखिया एचडी देवगौड़ा से बात कर दोनों को एक साथ आने का सुझाव दिया था. बसपा के आंतरिक सूत्रों की मानें तो मायावती ने पार्टी के राज्यसभा सांसद अशोक सिद्धार्थ को चुनाव के परिणाम आने के बाद कांग्रेस नेता गुलाम नबी आजाद से मिलने को कहा था.

इसके बाद गुलाम नबी आजाद ने भी सोनिया गांधी को जेडीएस से हाथ मिलाने को कहा. इसके बाद मायावती ने जेडीएस के देवगौड़ा से बात की और उन्हें कांग्रेस के साथ गठबंधन के लिए मनाया. इसके बाद सोनिया को भी फोन करके मायावती ने बात कर जेडीएस के साथ के लिए मनाया.

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स्रोत: palpalindia.com

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