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नाफेड के गोदामों में सैकड़ों टन सड़ गई प्याज, रखरखाव के तरीके पर उठ रहे सवाल

७ अक्‍तूबर, २०१८ २:५५ पूर्वाह्न
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नाफेड के गोदामों में सैकड़ों टन सड़ गई प्याज, रखरखाव के तरीके पर उठ रहे सवाल

मुंबई. महाराष्ट्र के तीन गोदामों में बड़ी मात्रा में नाफेड द्वारा खरीदा गई प्याज सड़ने लगी है. यह प्याज नाफेड ने किसानों से ग्यारह सौ रुपए क्विंटल के भाव से खरीदा था, लेकिन अब ये प्याज नाफेड के गोडाउन में कौड़ियों के भाव बिकने की स्थिति में है. नाफेड के 6500 टन में से आधी से ज्यादा प्याज सड़ चुकी है. अगर सरकारी घाटा कम करने के लिए सड़ी प्याज को बेचा जाता है तो पहले तो खरीद दार नहीं मिलेगा और मिला भी तो 4 से 5 रुपये से ज्यादा किलो नहीं बिकेगा.

किसानों से फसल खरीद कर नाफेड अपने गोडाउन में उस वक्त के लिए रखती है कि बाजार में कीमतें बढ़ने पर सरकार कम कीमत पर फसल लोगों को मुहैया करा सके. नासिक, पूणे और अहमदनगर में तकरीबन 6500 टन प्याज को नाफेड द्वारा खरीदा गया है, लेकिन जिस तरीके से प्याज रखा गया है वह लापरवाही और पैसे की बर्बादी की कहानी कह रहा है. इस 6500 टन में से 1300 टन सरकार के बफर स्टॉक का प्याज है.

सरकार ने तकरीबन 1100 रूपए क्विंटल के हिसाब से ये प्याज किसानों से खरीदा और इसके रखरखाव का खर्च अलग, लेकिन फिलहाल मार्केट में प्याज की कीमत 8 से 10 रुपए किलो है. हालांकि नासिक के गोडाउन में नाफेड के जरिए खरीदे गए प्याज को बाजार में बढ़ी कीमतों के दौरान सरकार के जरिए वितरित करने थे.

व्यापारियों का मानना है कि नाफेड के जरिए उठाया गया कदम और रखरखाव में कई कमियां हैं जिससे न तो व्यापारियों को फायदा हो सकता है और न ही उपभोक्ता और किसानों को ही. व्यापारी अब नाफेड के काम करने के तौर तरीके पर सवाल उठा रहे हैं.

जानकारों के मुताबिक प्याज के रखरखाव का तकनीक आधुनिक होना चाहिए. नासिक के लासलगांव में बीएआरसी की एक यूनिट है जिसमें अगर प्याज को लंबे दिनों तक रखना है तो उसे रेडिएट किया जाता है. जिसकी कीमत तकरीबन 50 पैसे से एक रुपए प्रति किलो आती है. नाफेड द्वारा खरीदे गए प्याज को गोडाउन में रखने से पहले इस प्रोसेस के आधार पर नहीं रखा गया है जिससे प्याज जल्दी खराब हो रही है. हालांकि इससे प्याज के कारोबार पर कोई असर नहीं आएगा लेकिन यह नुकसान सरकार का हुआ है.

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स्रोत: palpalindia.com

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