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पहले टेंडर निकालने में विभाग ने की नियमों की अनदेखी, मीडिया में खबर आने के बाद दिया एफआईआर का आदेश, कंपनी से मांगा स्पष्टीकरण

१३ फ़रवरी, २०१८ ९:२६ पूर्वाह्न
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पहले टेंडर निकालने में विभाग ने की नियमों की अनदेखी, मीडिया में खबर आने के बाद दिया एफआईआर का आदेश, कंपनी से मांगा स्पष्टीकरण

Ranchi: 2016 में कृषि एवं पशुपालन विभाग ने करीब पांच करोड़ रुपये का चारा खरीदने के लिए टेंडर निकाला. साफ तौर से टेंडर किसी एक कंपनी को फायदे पहुंचाने के लिए निकाला गया था. महालेखाकार की रिपोर्ट के बाद जब यह मामला मीडिया में आया, तो विभाग एफआईआर का आदेश दे रहा है. साथ ही कंपनी से स्पष्टीकरण मांगा जा रहा है, लेकिन गौर करने वाली बात यह है कि कैसे विभाग ने कंपनी को फायदा पहुंचाने के लिए काम किया. कैसे सारे नियमों को विभाग ने ताक पर रखकर टेंडर प्रक्रिया को पूरा किया. सबसे पहले ये जानना जरूरी है कि कैसे कंपनी ने टेंडर निकालने में कंपनी को फायदा पहुंचाया.

टेंडर अखबार में आने के बाद सात कंपनियों ने टेंडर डाला. एल-1 मानते हुए M/s KPR Agrochem Ltd. को 16 दिसंबर 2016 को काम दे दिया गया. प्वाइंट में समझें गड़बड़ियों को.

- टेंडर की अधिसूचना के क्लाउज नौ के मुताबिक कंपनी में इनहाउस रिसर्च एंड डेवलपमेंट की व्यवस्था होनी चाहिए. साथ ही काम से जुड़े क्षेत्र में शोध के तीन साल का प्रमाण देना अनिवार्य था. M/s KPR Agrochem Ltd. ने इस संबंध में अपने रिसर्च एंड डेवलपमेंट यूनिट का नाम M/s Sri Sai Swarup Seeds Pvt ltd. तेलंगाना का नाम दिया था, जो कि एक बीज उत्पादन से जुड़ी संस्थान है ना कि पशु आहार बनाने वाली संस्था है. साथ किसी तरह का कोई शोध भी संस्थान की तरफ से नहीं किया गया है.

स्रोत: newswing.com

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