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प्रदीप द्विवेदी: अपने शत्रु को अपने से छोटा कभी मत समझो!

६ नवंबर, २०१७ ४:१६ पूर्वाह्न
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प्रदीप द्विवेदी: अपने शत्रु को अपने से छोटा कभी मत समझो!

राजंदाजी. अभिनेता से राजनेता बने शत्रुघ्न सिन्हा का एक फेमस डायलॉग था... अपने शत्रु को अपने से छोटा कभी मत समझो... रावण ने भी हनुमान को एक छोटा-सा बंदर समझा था और उसने सारी लंका में आग लगा दी थी.

कुछ इसी अंदाज में शत्रुघ्न सिन्हा ने एक बार फिर भाजपा के कर्ताधर्ताओं को खरी-खरी सुनाई है, शत्रुघ्न सिन्हा ने प्रेस से कहा... मुझे लगता है कि हमें वर्तमान हालात को देखते हुए हमारे प्रतिद्वद्वियों को हल्के में नहीं लेना चाहिए... हमें युवाओं, किसानों, व्यापारियों आदि के बीच बढ़ते असंतोष को देखते हुए गुजरात और हिमाचल प्रदेश, दोनों में एक बड़ी चुनौती का सामना करना पड़ सकता है.

केन्द्र में भाजपा कर्ताधर्ताओं के तौर-तरीकों पर टिप्पणी करते हुए शत्रुघ्न ने कहा कि... भाजपा लोगों की उम्मीदों पर खरी उतर सकती है, यदि वह 'वन मैन या टू मैन शोÓ की सेना के रूप में काम करना बंद कर दे.

उन्होंने कहा कि... युवाओं, किसानों, व्यापारियों आदि में भाजपा के प्रति वर्तमान नीतियों को लेकर असंतोष दिखाई देता है.

इन बागी तेवरों के बावजूद सिन्हा ने किसी दूसरी पार्टी में शामिल होने की सम्भावनाओं को खारिज कर दिया और कहा... मैंने पार्टी छोडऩे के लिए कभी ज्वाइन नहीं की, पर जब मैं अपनी चुनौतियों का सामना करने की बात करता हूं तो उसका मतलब होता है किसी एक व्यक्ति विशेष या दो व्यक्ति के पीछे नहीं दौडऩा.

भाजपा के वरिष्ठ नेताओं से राजनीतिक किनारा कर देने से नाराज सिन्हा ने कहा कि... भाजपा को अपना भारी योगदान देने वाले अनुभवी नेताओं के आशीर्वाद से एकजुट होकर विकास के लिए एक साथ आना चाहिए... लालकृष्ण आडवाणी, मुरली मनोहर जोशी, यशवंत सिन्हा, अरुण शौरी जैसे दिग्गजों की गलती मैं आज तक समझ नहीं पा रहा हूं... उन्हें क्यों छोड़ दिया गया? हम सभी एक परिवार की तरह हैं. अगर कोई गलती थी, तो क्यों सुलह का कोई प्रयास नहीं किया गया?

याद रहे, लोकसभा चुनाव २०१४ में नरेन्द्र मोदी के नेतृत्व में शानदार सफलता के बाद कई वरिष्ठ भाजपाइयों को अघोषित राजनीतिक संन्यास दे दिया गया था तो कई प्रभावशाली भाजपा नेता उसके बाद से साधारण भूमिका में नजर आ रहे हैं, लेकिन गुजरात चुनाव की हलचल के बाद से कई मौन बागी मुखर होते जा रहे हैं... सैद्धांतिक विरोध यदि प्रायोगिक रूप लेता है तो यकीनन्, भाजपा के विजय रथ की गति को प्रभावित करेगा.

स्रोत: palpalindia.com

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