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प्रदीप द्विवेदीः ऐणनी आई- आई, ने आणनी आई डाक्कण?

५ दिसंबर, २०१८ २:४० पूर्वाह्न
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प्रदीप द्विवेदीः ऐणनी आई- आई, ने आणनी आई डाक्कण?

मुद्दा. राजस्थान में वागड़ी की एक कहावत इनदिनों खासी चर्चा में है- ऐणनी आई... आई, ने आणनी आई डाक्कण! अर्थात... उनकी मां तो मां है और इनकी मां डायन है? चुनाव के माहौल में सभी दलों के बेलगाम नेता अमर्यादित बयानबाजी कर रहे हैं और एक-दूसरे पर गाली देने के आरोप लगा रहे हैं. वर्ष 2013 में अमर्यादित टिप्पणियों के शुरूआती दौर में राहुल गांधी, सोनिया गांधी आदि कांग्रेस के नेताओं पर सोशल मीडिया पर अनेक अमर्यादित टिप्पणियां होती रही, लेकिन तब खामोशी छाई रही, अब जबकि पानी सिर के उपर से गुजरता जा रहा है और अमर्यादित टिप्पणियों का शिकार सत्ता पक्ष सहित सभी दलों के प्रमुख नेता हो रहे हैं, तब इसको नियंत्रित करने के बारे में सोचा जा रहा है? हालांकि, अब सियासी माहौल में भी तेजी से बदलाव हो रहा है.

इसी का नतीजा है कि बांसवाड़ा की पार्षद सीता डामोर ने राहुल गांधी को पप्पू कहने पर एक भाजपा सांसद का जोरदार विरोध किया. खबर है कि... एक भाजपा सांसद ने जब कांग्रेस अध्यक्ष राहुल गांधी को कथित तौर पर पप्पू कहा तो कांग्रेस पार्षद उनसे भिड़ गईं. गुजरात से भाजपा सांसद देवजी भाई चुनाव प्रचार के लिए आए हुए थे. प्रचार के दौरान एक सभा को संबोधित करते हुए उन्होंने कथित तौर पर राहुल गांधी को पप्पू बोल दिया, जिससे वहां मौजूद कांग्रेस पार्षद सीता डामोर को गुस्सा आ गया और वह उनसे भिड़ गईं. कांग्रेस पार्षद सीता डामोर का कहना था कि- सांसद ने कहा कि पप्पू को बुलाओ, पप्पू गड्ढे भरेगा.

यह गलत है, इसलिए मैंने इसका विरोध किया. वह कैसे हमारे लोकप्रिय नेता को पप्पू कह सकते हैं? अब अमर्यादित टिप्पणियों के वार से पीएम मोदी भी नहीं बच पा रहे हैं. सियासी मर्यादाओं की सारी सीमाएं लांघते हुए जहां एआईएमआईएम प्रमुख असदद्दुीन ओवैसी और यूपी के सीएम योगी आदित्यनाथ के बीच जो वार-पलटवार का सिलसिला चल रहा था, अब उसमें अकबरुद्दीन ओवैसी की भी अमर्यादित एंट्री हो गई है? खबरों पर भरोसा करें तो अकबरु्द्दीन ने पीएम नरेंद्र मोदी पर अमर्यादित हमला बोला और हैदराबाद के चारमिनार विधानसभा क्षेत्र में रैली को संबोधित करते हुए उन्होंने कहा कि- चाय वाले, हमें मत छेड़, चाय-चाय चिल्लाते हो, याद रखो इतना बोलूंगा कि...!

सोशल मीडिया से शुरू हुई अमर्यादित टिप्पणियों की सियासी धूलंड़ी में अब सियासी दलों के नेता भी शामिल हो गए हैं. शुरूआत में भले ही राहुल गांधी, सोनिया गांधी इसके शिकार हुए हों, लेकिन अब सभी दलों के बड़े नेता इसका शिकार हो रहे हैं? अभिव्यक्ति की आजादी से शुरू हुआ यह बेलगाम बयानों का सिलसिला अभिव्यक्ति की आत्मघाती अराजकता की ओर बढ़ता जा रहा है!

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स्रोत: palpalindia.com

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