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प्रदीप द्विवेदीः दक्षिण राजस्थान पर ध्यान नहीं दिया तो आधा दर्जन लोकसभा सीटें खो देगी कांग्रेस?

१३ जनवरी, २०१९ ५:३१ अपराह्न
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प्रदीप द्विवेदीः दक्षिण राजस्थान पर ध्यान नहीं दिया तो आधा दर्जन लोकसभा सीटें खो देगी कांग्रेस?

इनदिनों. राजस्थान के पूर्व गृहमंत्री गुलाबचन्द कटारिया को भाजपा ने नेता प्रतिपक्ष बनाया है. विधायक दल की बैठक में उनके नाम का प्रस्ताव राजस्थान की पूर्व मुख्यमंत्री वसुंधरा राजे ने रखा और एकमात्र नाम होने के कारण उनके नाम का एलान कर दिया गया. कटारिया की नियुक्ति से कांग्रेस के लिए दक्षिण राजस्थान में चुनौतियां बढ़ जाएंगी, क्योंकि इस क्षेत्र में कटारिया की मजबूत प्रभावी पकड़ है.

राजस्थान विस चुनाव भले ही कांग्रेस ने जीता हो, लेकिन दक्षिण राजस्थान में कांग्रेस को उम्मीद के अनुरूप कामयाबी नहीं मिली, बावजूद इसके कांग्रेस ने इस संभाग से केवल दो मंत्रियों- उदयलाल आंजना और अर्जुन बामनिया को ही मंत्रिमंडल में जगह दी गई. ये दोनों मंत्री अपने क्षेत्र के प्रभावी नेता हैं, लेकिन मंत्रिमंडल में दक्षिण राजस्थान के दिग्गज नेता पूर्व केन्द्रीय मंत्री सीपी जोशी, प्रमुख आदिवासी नेता पूर्व मंत्री महेन्द्रजीत सिंह मालवीया, दयाराम परमार जैसे प्रमुख नेताओं को जगह नहीं दी गई. दक्षिण राजस्थान में यदि इन नेताओं के साथ-साथ पूर्व केन्द्रीय मंत्री गिरिजा व्यास, डंूगरपुर कांग्रेस जिलाध्यक्ष दिनेश खोड़निया, पूर्व सांसद ताराचन्द भगोरा जैसे नेताओं को सत्ता-संगठन में महत्वपूर्ण जिम्मेदारियां दे कर सक्रिय नहीं किया गया तो दक्षिण राजस्थान की आधा दर्जन सीटें कांग्रेस के हाथ से निकल सकती हैं.

उल्लेखनीय है कि राजस्थान में नए मंत्रिमंडल के गठन के तुरंत बाद ही असंतोष का दौर भी शुरू हो गया था, इस असंतोष पर ध्यान देना इसलिए जरूरी है कि कुछ ही माह बाद लोकसभा चुनाव हैं. असंतुष्ट नेता और उनके समर्थक चुनाव में सक्रिय नहीं रहे तो कांग्रेस की अधिकतम सीटें जीतने की संभावनाओं को झटका लग सकता है, क्योंकि अभी भी राजस्थान में प्रतिशत मत के हिसाब से कांग्रेस-भाजपा में कोई खास फर्क नहीं है.

क्योंकि, दक्षिण राजस्थान कभी कांग्रेस का गढ़ रहा है, इसलिए अभी भी यहां कांग्रेस के लिए संभावनाएं तो हंै, लेकिन उन संभावनाओं को जीत में बदलने के लिए कम-से-कम दो बातों पर ध्यान देना होगा, एक- इस क्षेत्र के प्रमुख और प्रभावी नेताओं को सत्ता-संगठन में महत्वपूर्ण जिम्मेदारियां दे कर उनको सक्रिय करना, दो- गुटबाजी को नियंत्रित करना!

भाजपा अब दक्षिण राजस्थान में कमजोर नहीं है, संघ की विचारधारा पर आधारित गांव, कस्बों के विद्यालयों ने वैचारिक धरातल पर भाजपा को मजबूती दी है. इसलिए अब भाजपा को हल्के में लेना कांग्रेस की भूल होगी.

सियासी सारांश यही हैं कि- यदि कांग्रेस ने दक्षिण राजस्थान पर गंभीरता से ध्यान नहीं दिया तो इस क्षेत्र की करीब आधा दर्जन लोस सीटों पर प्रश्नचिन्ह लग जाएगा, क्योंकि विस चुनाव में हार के बाद भाजपा ने फिर से यह गढ़ जीतने की कोशिशें शुरू कर दी हैं!

स्रोत: palpalindia.com

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