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प्रदीप द्विवेदी: पेट्रोल कहां महंगा है, भाई? तब भी एक डालर प्रति लीटर ही तो था!

२ सितंबर, २०१८ ३:५२ अपराह्न
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प्रदीप द्विवेदी: पेट्रोल कहां महंगा है, भाई? तब भी एक डालर प्रति लीटर ही तो था!

खबरंदाजी. नासमझ लोग बेवजह गैस-पेट्रोल के रेट को लेकर हंगामा मचा रहे हैं? व्हाट्सेपिए, वाद-विवाद कर रहे हैं... फेसबुकिए, फेस बिगाड़ रहे हैं! अंतरराष्ट्रीय अर्थव्यवस्था की समझ तो है नहीं, बस... जो मन में आया ताना मार दिया? अरे, विश्व अर्थव्यवस्था की समझ होगी तभी मन की बात में वजन आएगा!

कांग्रेस के जमाने में एक डालर पचपन रुपए का था तो एक लीटर पेट्रोल का दाम हुआ एक डालर, आज एक डालर सत्तर रुपए का है तो एक लीटर पेट्रोल का दाम आज भी है- एक डालर! कहां महंगा हुआ?

कांग्रेस के जमाने में भी गैस सिलेंडर करीब दस डालर का मिलता था, आज भी तकरीबन उतने में ही मिल रहा है? कहां गैस सिलेंडर महंगा हुआ?

सोशल मीडिया पर पीएम मोदी का सीएम मोदी के जमाने का पेट्रोल के बढ़ते दामों पर बयान इनदिनों चर्चा में है? अरे, बयान की कोई एक्सपायरी डेट भी होती है कि नहीं! 2012 के बयान का 2018 में क्या मतलब?

दिक्कत यह है कि आम आदमी ने विदेश यात्राएं नहीं की हैं, इसलिए उन्हें विश्व अर्थ व्यवस्था की जानकारी ही नहीं है? लेकिन, गैस-पेट्रोल के चक्कर में व्हाट्सएप पर... फेसबुक पर, बाबा रामदेव का बेवजह चक्रासन हो गया!

तब आप की अदालत में जितने लोगों ने बाबा रामदेव को नहीं देखा-सुना था, उससे कई ज्यादा दर्शक अब तक बाबा का दर्शन कर चुके हैं? अब, बाबा रामदेव की सरकार तो है नहीं कि पैतीस रुपए लीटर पेट्रोल और चार सौ रुपए का गैस सिलेंडर बांट देते! और वैसे भी... गैस-पेट्रोल स्वदेशी तो हैं नहीं, इसलिए इनका तो बहिष्कार होना चाहिए जैसे चीनी सामान का सफलतापूर्वक कर चुके हैं?

देश में जुगाड़ का जादू भी कम मजेदार नहीं है? गंदे नाले की गैस से चाय तो बन ही रही है, कोई-न-कोई नाले के पानी से गाड़ी भी चला कर दिखा देगा! देखना, एक दिन गैस सिलेंडर का कोई खरीददार नहीं मिलेगा, और... विदेशी तो पेट्रोल बेचने के लिए तरस जाएंगे!

रावण, पुष्पक विमान की तकनीक अपने साथ ले गया और संजय ने टीवी-इंटरनेट की टेक्नोलॉजी सार्वजनिक नहीं की, वरना आज सोशल मीडिया के लिए विदेशी तकनीक की जरूरत ही नहीं पड़ती?

दरअसल, यह सारी गंदगी सोशल मीडिया फैला रहा है? इसीलिए, बार-बार कहा जा रहा है कि सोशल मीडिया के माध्यम से गंदगी न फैलाएं! लेकिन, पप्पू को यह समझ में नहीं आ रहा है कि इसकी शुरूआत कहां से हुई?

स्रोत: palpalindia.com

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