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पैराडाइज़ पेपर्सः सामने आई ऐपल की गुप्त टैक्स मांद

७ नवंबर, २०१७ २:१६ पूर्वाह्न
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पैराडाइज़ पेपर्सः सामने आई ऐपल की गुप्त टैक्स मांद

‘द पैराडाइज़ पेपर्स’ से पता चला है कि दुनिया में सबसे ज़्यादा मुनाफ़ा कमाने वाली फर्म के पास एक नया गुप्त ढांचा है जो उसे अरबों रुपए का टैक्स बचाते रहने में मदद करेगा.

दस्तावेज़ों से पता चला है कि ऐपल ने किस तरह 2013 में अपनी विवादित ‘आयरिश कर प्रणाली’ पर सरकारी चाबुक चलने के बाद कर बचाने के लिए नए टैक्स हेवन की तलाश शुरू कर दी थी.

इसके बाद ऐपल ने अपना अधिकांश करमुक्त कैश रिज़र्व रखने वाली कंपनी को जर्सी में स्थानांतरित कर लिया था.

ऐपल का कहना है कि वो अब भी दुनिया में सबसे ज़्यादा कर देने वाली कंपनी है. बीते तीन सालों में ऐपल ने 35 अरब डॉलर का कॉर्पोरेट टैक्स चुकाया है.

कंपनी का ये भी कहना है कि वह क़ानूनों का पालन करती है और उसके ढांचागत बदलाव से “किसी भी देश में कर अदायगी में कोई कमी नहीं आई है.”

2014 तक ऐपल ने अमरीकी और आयरिश कर क़ानूनों की एक ख़ामी का फ़ायदा उठाते हुए कर बचाया. इसे ‘डबल आयरिश’ के नाम से जाना जाता था.

इससे ऐपल अमरीका के बाहर हुई सभी बिक्री, जो अभी कुल आय का 55 प्रतिशत है, को अपनी आयरिश सहायक कंपनियों के ज़रिए दिखाता था. इन सहायक कंपनियों पर कर नहीं लगता था जिससे ऐपल की बाहरी आय पर टैक्स की देनदारी बच जाती थी.

आयरलैंड में लागू 12.5 प्रतिशत कॉर्पोरेशन टैक्स या अमरीका में लागू 35 प्रतिशत कॉर्पोरेट टैक्स चुकाने के बजाय, ऐपल ने टैक्स बचाने का जो ढांचा बनाया था, उससे अमरीका के बाहर हुए मुनाफ़े पर विदेशों में चुकाया गया कर इतना कम हो जाता था कि वह कुल विदेशी आय का मुश्किल से पांच प्रतिशत ही हो पाता था. और कभी-कभी तो यह दो प्रतिशत तक गिर जाता था.

यूरोपीय आयोग ने अपनी गणना में पाया कि ऐपल की एक सहायक आयरिश कंपनी पर एक साल में लगा कर सिर्फ़ 0.005 प्रतिशत था.

अमरीकी सीनेट ने साल 2013 में ऐपल पर दबाव बनाया था और तब सीईओ टिम कुक को कंपनी की कर व्यवस्था का बचाव करने के लिए मजबूर होना पड़ा था.

अमरीका को हो रहे कर के भारी नुक़सान से ग़ुस्साए सीनेटर कार्ल लेविन ने उनसे कहा था, “आपने सोने के अंडे देने वाली वो मुर्गी आयरलैंड भेज दी. आपने उसे ऐसी तीन कंपनियों में भेज दिया जो आयरलैंड में भी टैक्स नहीं चुकाती हैं. ये ऐपल के ताज में जड़े हीरे हैं. साथियो, ये सही नहीं है.”

जवाब में कुक ने कहा था, “हम पर जो भी कर लागू होते हैं, हम वो चुकाते हैं. हर अंतिम डॉलर चुकाते हैं. हम टैक्स बचाने के हथकंडों पर निर्भर नहीं है. हम कैरीबिया के किसी द्वीप में अपना कैश जमा नहीं रखते हैं.”

2013 में जब यूरोपीय संघ ने ऐलान किया कि वो ऐपल और आयरलैंड के बीच हुए कर समझौते की जांच कर रहा है तब आयरलैंड की सरकार ने फ़ैसला किया कि आयरलैंड में गठित कंपनियां टैक्स निर्धारण के लिए राष्ट्रविहीन नहीं रहेंगी.

अपने कर कम रखने के लिए, ऐपल को ऑफशोर फाइंनेशियल सेंटर (ओएफ़सी) की ज़रूरत थी जो उसकी आयरिश सहायक कंपनियों के लिए टैक्स रेसिडेंसी का काम कर सके.

मार्च 2014 में ऐपल के क़ानूनी सलाहकारों ने सवालों की एक सूची ऐपलबी को भेजी. ऐपलबी एक शीर्ष ऑफशोर लॉ फ़र्म है और द पैराडाइज़ पेपर लीक का मुख्य स्रोत भी है.

इन सवालों में पूछा गया कि द ब्रिटिश वर्जिन ऑयरलैंड, बरमुडा, द कैयमैन आयलैंड, मॉरिशस, द आइल ऑफ़ मैन, जर्सी और गर्नसे जैसे बाहरी न्यायक्षेत्र ऐपल को क्या सुविधाएं दे सकते हैं.

इन सवालों में ये भी पूछा गया था कि क्या वहां सरकार बदल सकती है, जनता की पहुंच कितनी जानकारियों तक होगी और न्यायक्षेत्र से बाहर निकलना कितना आसान या मुश्किल होगा.

तीन साल की जांच के बाद अगस्त 2016 में यूरोपीय आयोग इस नतीजे पर पहुंचा कि आयरलैंड ऐपल को अवैध तरीके से कर लाभ पहुंचा रहा है.

यूरोपीय आयोग ने कहा कि ऐपल को जांच की अवधि, 2002-2013, तक के आयरलैंड में लागू कर चुकाने होंगे. ये रक़म कुल 13 अरब यूरो की थी. ऐपल से एक अरब यूरो का ब्याज़ चुकाने के लिए भी कहा गया था.

आयरलैंड ने तर्क दिया कि यूरोपीय संघ उसकी कर निर्धारण की संप्रभुता में हस्तक्षेप कर रहा है. आयरलैंड ने डर ज़ाहिर किया कि बहुराष्ट्रीय कंपनियां कहीं और चली जाएंगी.

आयरलैंड 13 अरब यूरो जमा करने के लिए तैयार हो गया, तय हुआ कि ये रकम अपील पर फ़ैसला आने तक एक एस्क्रो अकाउंट में रखी जाएगी.

अक्तूबर 2017 में यूरोपीय आयोग ने कहा कि वो आयरलैंड के ख़िलाफ़ मुक़दमा करेगा क्योंकि आयरलैंड ने पैसा जमा नहीं करवाया है.

आयरलैंड ने तर्क दिया कि ये बहुत जटिल प्रक्रिया है और उसे अधिक समय चाहिए.

जब ‘डबल आयरिश’ ख़ामी को ख़त्म कर दिया गया तो आयरलैंड ने नए कर नियम लागू किए, जिनका एपल जैसी कंपनियां फ़ायदा उठा सकें.

ऐपल ने जिन कंपनियों को जर्सी स्थानांतरित किया था, उनमें से एक, एएसआई, के पास ऐपल की कई बेशक़ीमती इंटलेक्चुअल प्रॉपर्टी के अधिकार थे.

अगर एएसआई इन इंटलेक्चुअल प्रॉपर्टीज़ को किसी आयरिश कंपनी को वापस बेचती तो आयरिश कंपनी भविष्य में होने वाले किसी भी मुनाफ़े के विपरीत होने वाले भारी खर्च को पूरा करने में सक्षम होती.

क्योंकि इंटेलेक्चुअल प्रॉपर्टी अधिकार रखने वाली एएसआई जर्सी में पंजीकृत थी. ऐसे में बिक्री के फ़ायदे पर कर नहीं लगता.

ऐसा प्रतीत होता है कि ऐपल ने बिलकुल ऐसा ही किया. साल 2015 में आयरलैंड के जीडीपी में 26 प्रतिशत का भारी उछाल आया था. मीडिया रिपोर्टों के मुताबिक ये आयरलैंड आ रहे इंटलेक्चुअल प्रापर्टी अधिकारों की वजह से था. उस साल आयरलैंड में अमूर्त संपत्तियों 250 अरब यूरो की भारी भरकम राशि तक पहुंच गईं थीं.

आयरलैंड के वित्तीय विभाग ने इस बात का खंडन किया था कि नए कर नियम बहुराष्ट्रीय कंपनियों को फ़ायदा पहुंचाने के लिए लागू किए गए हैं.

वित्तीय विभाग ने कहा था कि आयरलैंड “कंपनियों को अमूर्त संपत्तियों पर पूंजीगत कटौतियों का दावा करने की अनुमति देने वाला अकेला देश नहीं है” और उसने “अंतरराष्ट्रीय मानकों का पालन किया है.”

ऐपल ने अपनी दो सहायक कंपनियों के टैक्स क्षेत्रों को जर्सी में स्थानांतरित करने संबंधी सवालों का जवाब नहीं दिया है.

जब ऐपल से पूछा गया कि क्या उनमें से एक कंपनी ने इंटलेक्चुअल प्रॉपर्टी की बिक्री से बड़ी टैक्स राहत हासिल करने में मदद की है तो इस पर टिप्पणी करने से भी ऐपल ने इनकार कर दिया.

ऐपल ने कहा, “जब आयरलैंड ने साल 2015 में अपने कर क़ानून बदल दिए तो हमने उनका पालन करने के लिए अपनी आयरिश सहायक कंपनियों का कर क्षेत्र बदल लिया और इस बारे में आयरलैंड, यूरोपीय आयोग और अमरीका को जानकारी दे दी.”

“हमने जो बदलाव किए, उससे हम पर किसी भी देश में लगने वाले कर कम नहीं हुए. वास्तव में, आयरलैंड में चुकाए गए हमारे करों में भारी वृद्धि हुई और बीते तीन सालों में हमने आयरलैंड में 1.5 अरब डॉलर का कर चुकाया है.”

पैराडाइज पेपर्स- ये बड़ी संख्या में लीक दस्तावेज़ हैं, जिनमें ज़्यादातर दस्तावेज़ आफ़शोर क़ानूनी फर्म ऐपलबी से संबंधित हैं. इनमें 19 तरह के टैक्स क्षेत्र के कारपोरेट पंजीयन के पेपर भी शामिल हैं. इन दस्तावेज़ों से राजनेताओं, सेलिब्रेटी, कारपोरेट जाइंट्स और कारोबारियों के वित्तीय लेनदेन का पता चलता है.

1.34 करोड़ दस्तावेज़ों को जर्मन अख़बार ने हासिल किया है और इसे इंटरनेशनल कंसोर्शियम ऑफ़ इंवेस्टिगेटिव जर्नलिस्ट्स (आईसीआईजे) से शेयर किया है. 67 देशों के क़रीब 100 मीडिया संस्था से इसमें शामिल हैं, जिसमें गार्डियन भी शामिल है. बीबीसी की ओर से पैनोरमा की टीम इस अभियान से जुड़ी है. बीबीसी के इन दस्तावेज़ों को मुहैया कराने वाले स्रोत के बारे में नहीं जानती.

स्रोत: mediadarbar.com

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