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बीजेपी ने ली चुटकी, तेजप्रताप की शादी में क्यों नहीं पहुंचे सोनिया-राहुल-ममता

१४ मई, २०१८ ४:५४ पूर्वाह्न
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बीजेपी ने ली चुटकी, तेजप्रताप की शादी में क्यों नहीं पहुंचे सोनिया-राहुल-ममता

पटना. आरजेडी सुप्रीमो लालू प्रसाद यादव के बटे तेजप्रताप यादव का शादी समारोह खत्म हो चुका है और अब इसपर राजनीति शुरु हो गई है. यूपीए अध्यक्ष सोनिया गांधी, कांग्रेस अध्यक्ष राहुल गांधी और पश्चिम बंगाल की मुख्यमंत्री ममता बनर्जी के शादी में नहीं पहुंचने को लेकर बीजेपी ने लालू यादव और आरजेडी पर चुटकी ली है. बीजेपी का दावा है कि विपक्षी एकता की बात बस हवाबाजी है. विपक्षी दल लालू को अपना नेता नहीं मानते हैं. जबकि आरजेडी ने शादी समारोह को विपक्षी एकता का मंच मानने से साफ इन्कार कर दिया है, जिसके बाद एकबार फिर तेजप्रताप की शादी सियासी सुर्खियों में पहुंच गई है.

आरजेडी सुप्रीमो ने अपने बेटे की शादी के लिए देश के तमाम बड़े नेताओं को निमंत्रण भेजा था. उम्मीद की जा रही थी कि सत्तारूढ दल के नेता भले ही शादी में न शामिल हों, लेकिन विपक्षी दलों के बड़े नेता जरूर एक मंच पर नजर आएंगे. लेकिन हुआ बिल्कुल उल्टा. शादी के मंच पर बिहार के मुख्यमंत्री नीतीश कुमार और केंद्रीय मंत्री रामविलास पासवान जैसे बड़े नेता तो पहुंचे. लेकिन विपक्षी दलों का कोई भी बड़ा चेहरा नजर नहीं आया. बीजेपी अब मामले पर चुटकी ले रही है.

दरअसल तेजप्रताप की शादी को लेकर लालू प्रसाद ने राहुल गांधी, सोनिया गांधी और ममता बनर्जी समेत विपक्षी दल के तमाम बडे नेताओं को निमंत्रण भेजा था. ये कयास लगाए जा रहे थे कि लालू के जेल से बाहर आने के बाद पहली बार शादी के मंच पर विपक्षी नेता एकजुटता का परिचय देते नजर आएंगे. शादी की शाम तक राहुल और प्रियंका गांधी के आने की खबरें लालू परिवार की ओर से मीडिया को दी जाती रहीं, लेकिन दोनों नहीं पहुंचे. आरजेडी के नेता कर्नाटक में कांग्रेस की साख को दांव पर लगा होने का हवाला देकर मामले को शांत करते नजर आ रहे हैं.

इधर, बिहार कांग्रेस के नेता भी मामले को बैलेंस करने में जुटे हैं. राहुल गांधी और सोनिया गांधी के शादी में नहीं आने को विपक्षी एकता में कमी की भूल नहीं समझने की सलाह दी जा रही है. वैसे तेजप्रताप की शादी में नीतीश कुमार रामविलास पासवान की मौजूदगी ने खूब सुर्खियां बटोरी. वहीं, बीजेपी की ओर से बिहार के केन्द्रीय मंत्री और बड़े चेहरों का समारोह में शामिल नहीं होना भी सुर्खियों में रहा. शादी सियासत से ज्यादा सामाजिक सरोकार का मसला माना जाता है, लेकिन जहां सियाजी दिग्गजों का जुटान हो जाता है वहां समारोह पर सियासत की चादर खुद ब खुद चढ़ जाती है.

स्रोत: palpalindia.com

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