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लोगों को अंधेरे में रखकर हो रहा है स्‍मार्ट सड़क के लिए जमीन अधिग्रहण का काम

३१ जनवरी, २०१८ ४:४३ पूर्वाह्न
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लोगों को अंधेरे में रखकर हो रहा है स्‍मार्ट सड़क के लिए जमीन अधिग्रहण का काम

Ranchi : रांची में चार स्‍मार्ट सड़कें बनेंगी. इसमें से एक का शिलान्‍यास कर दिया गया है. जबकि स्‍मार्ट सड़क के लिए भूमि अधिग्रहण का काम पूरा नहीं हो पाया है. पथ निर्माण विभाग की ओर से राजभवन से कांटाटोली तक बनेंगी. इसके लिए 92 करोड़ लाख खर्च होंगी. इसके साथ ही और तीन स्‍मार्ट सड़कें रांची एयरपोर्ट से बिरसा चौक, बिरसा चौक से राजभवन और राजभवन से बुटी मोड़ तक बनाने का प्रस्‍ताव है. एक सड़क का तो शिलान्‍यास कर दिया गया वहीं तीन सड़कों में भूमि अधिग्रहण का काम पूरा नहीं हो सका है.

राजभवन से बिरसा चौक तक स्‍मार्ट सड़क बनाने की भूमि अधिग्रहण की प्रकिया को पूरा करना सरकार के लिए एक बड़ी चुनौती बनी हुई है. सड़क के किनारे सालों से रहने वाले स्‍थानीय निवासी और व्यवसायी लगातार इसका विरोध कर रहे हैं.कई लोगों ने यह भी सवाल खड़ा किया कि बड़े बिल्‍डर और रियल एस्टेट की जगह को बचाने के लिए दूसरी ओर की जमीन नक्‍शा की दिशा को नजर अंदाज करते हुए भी नापी कर रहे हैं. इसके एवज में विभाग के अधिकारियों को बड़ा लाभ दिया जा रहा हैं.

हरमू रोड के प्रमोद लोहिया ने बताया कि 1968 से हम यहां रह रहे हैं. 1992 में भी हमने सड़क चौड़ीकरण के लिए सरकार को सड़क दी थी. अब सरकार कह रही है कि हम फिर से जमीन लेंगे और यहां फ्लाईओवर बनायेंगे. इस तरह की सरकारी कार्रवाई से हम बरबाद हो जायेंगे. आज नगर विकास मंत्री सीपी सिंह भी हमारी बात सुनने को तैयार नहीं हैं. प्रमोद बताते हैं भूमि अधिग्रहण के लिए जो भी अधिकारी आते हैं, उनके पास ज्‍यादा जानकारी नहीं है. वह कहते हैं कि हमलोग को ऊपर से आदेश है, वैसा काम कर रहे हैं. उनके पास कोई जानकारी नहीं होती है कि कितना जमीन मापी करना है. जमीन क्‍यों ली जा रहा है, यह भी कोई बताने को तैयार नहीं होते हैं.

हरमू रोड के अमित सेन गुप्‍ता का कहना है कि जब भी यहां पर सड़क चौड़ीकरण के लिए नापी की जाती है तो सिर्फ हमारी ही दुकान को लिया जाता है, दूसरी ओर की बड़ी दुकानों को छोड़ दिया जाता है. अभी तक दो-तीन बार हमारी जमीन का अधिग्रहण हुआ है और जमीन लिया गया है, जबकि दूसरी ओर की दुकानों को कुछ नहीं किया जा रहा है. इस बार की अधिग्रहण से पूरी दुकान की जमीन साफ हो जायेगी.

हरमू के ही मिथुन कुमार गुप्‍ता बताते हैं कि जब जमीन जब मापी होती है तो वो अधिकारी हमारी कुछ सुनते नहीं है, और ना ही कुछ बताते हैं कि किस बात की मापी की जा रही है. पहले भी मापी करके हमारी जमीन सरकार ले चुकी है और इस बार भी जमीन जायेगी, ज‍बकि सड़क की दाहिनी ओर की जमीन की मापी नहीं की जा रही है. मापी का क्‍या आधार है यह कोई बताने को तैयार नहीं है.

अनिल अग्रवाल बताने हैं कि उनकी भी जमीन की नापी की गई है लेकिन कितना जमीन अधिग्रहण किया जायेगा. उनका निर्माण टूटेगा या नहीं यह प्रशासन की ओर से कोई जानकारी नहीं दी गई है.

अगर किसी के घर के आस-पास नापी हो रही है तो उन्‍हें उसकी जानकारी क्‍यों नहीं दी जा रही है ?

स्‍मार्ट सड़क के लिए रोडमैप और नक्‍शा सार्वजनिक कर सरकार पारदर्शी क्‍यों नहीं बन रही ?

कुछ लोगों की मानें तो नाली और डिवाइडर को भी आधार माना जा रहा है, क्‍या शहर के सड़क और डिवाइडर नियमित तौर पर बने हुए हैं ?

जब सड़कों की चौड़ीकरण से संबंधित रोडमैप की जानकारी जुडको से मांगी गई तो वहां के जनरल मैनेजर डीके सिंह ने यह कहकर नक्‍शा देने से इनकार कर दिया कि अभी जमीन अधिग्रहरण का काम चल रहा है, इसलिए किसी तरह का नक्‍शा नहीं दिया जा सकता है. नक्‍शा जारी कर दिया गया तो भूमि अधिग्रहण में परेशानी आयेगी. जुडको ने बताया कि अभी 80 प्रतिशत जमीन अधिग्रहण का काम पूरा हुआ है. 20 प्रतिशत बाकी है. गौरतलब है कि स्‍मार्ट सड़क के लिए जुडको भू अर्जन विभाग का सहयोग कर रहा है. इसमें जुडको की टीम जमीन की नापी कर सड़क चौड़ीकरण के लिए नापी की जा रही है. जब भूअर्जन विभाग से भी नक्‍शा के बारे में पूछा गया, तो विभाग की ओर से सिर्फ रकवा की जानकारी दी गई और नक्शा से संबंधित जानकारी और दस्‍तावेजों की प्रति देने से इनकार कर दिया गया.

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स्रोत: newswing.com

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