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'शुभ मंगल सावधान' का असर, बोले डॉक्टर- इरेक्टाइल डिसफंक्शन अब हौवा नहीं

१२ सितंबर, २०१७ २:०७ पूर्वाह्न
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'शुभ मंगल सावधान' का असर, बोले डॉक्टर- इरेक्टाइल डिसफंक्शन अब हौवा नहीं

भूमि पेडनेकर और आयुष्मान खुराना की फिल्म शुभ मंगल सावधान बॉक्स ऑफिस ही नहीं पुरुषों के लिए भी शुभ साबित हो रही है. यह फिल्म पुरुषों की सेक्सुअल प्रॉब्लम इरेक्टाइल डिसफंक्शन पर बेस्ड है. आयुष्मान खुराना की फिल्म ने इस परेशानी का सामना कर रहे पुरुषों को हौसला दिया है. उन्हें प्रोत्साहित किया है कि वह इससे निपटने के लिए डॉक्टर की सलाह लें.

शुभ मंगल सावधान ने समाज को कड़ा संदेश दिया है और पुरुषों में जागरुकता बढ़ाई है. हिंदुस्तान टाइम्स को दिए इंटरव्यू में एक फर्टिलिटी एक्पर्सट ने कहा, विकी डोनर और शुभ मंगल सावधान जैसी फिल्मों ने सोसायटी में जागरुकता बढ़ाई है. इससे पहले पुरुषों की सेक्सुअल परेशानी को हौवा माना जाता था. हमारी सोसायटी को अब समझ आ गया है कि इन मुद्दों पर खुलकर बात करने की जरुरत है. हालिया रिलीज शुभ मंगल सावधान के बाद इरेक्टाइल प्रॉब्लम से जूझ रहे पुरुषों का इंफर्टिलिटी क्लीनिक में आना बढ़ा है.

एक और फर्टिलिटी एक्सपर्ट ने कहा कि धीरे-धीरे समाज से सेक्सुअल समस्याओं को लेकर हिचकिचाहट कम होती जा रही है, जिसमें शुभ मंगल सावधान का अहम रोल है. फिल्म रिलीज के बाद से हमारे पास ऐसे ज्यादा केस आने लगे हैं. अब पुरुष अपनी सेक्सुअल समस्या बताने में कम हिचकिचा रहे हैं.

आयुष्मान खुराना ने इससे पहले 2012 में रिलीज हुई फिल्म विक्की डोनर की थी. जिसमें वह स्पर्म डोनर बने थे. इसके बाद लोग स्पर्म डोनेशन के बारे में खुलकर बात करने लगे थे.

शुभ मंगल सावधान में पुरुषों की सेक्सुअल समस्या को मजाकिया अंदाज में दिखाया गया है. यह फिल्म हंसते-हंसाते एक बढ़िया सोशल मैसेज देती है. फिल्म ने बॉक्स ऑफिस पर 31.86 करोड़ की कमाई कर ली है.

यकीनन ही फिल्मों का हमारे समाज पर गहरा असर होता है. आजकल फिल्म इंडस्ट्री में सोशल मुद्दों पर फिल्में बनने लगी हैं. इसमें खास बात यह है कि इन फिल्मों दर्शक पसंद भी कर रहे हैं.

स्रोत: aajtak.intoday.in

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