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सपा-बसपा गठबंधन-उम्मीदवारी को लेकर फस सकता है पेंच

१३ जनवरी, २०१९ ७:४४ पूर्वाह्न
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सपा-बसपा गठबंधन-उम्मीदवारी को लेकर फस सकता है पेंच

लखनऊ. सपा और बसपा के बीच गठबंधन तो घोषित हो गया, लेकिन किस लोकसभा सीट पर कौन से दल का प्रत्याशी गठबंधन का उम्मीदवार होगा, इसको लेकर अभी तस्वीर साफ नहीं है. सीटों के बंटवारे के लिए सियासी गलियारों में जिस फार्मूले की चर्चा हो रही है, यदि उसके अनुसार सीट बंटती हैं तो पश्चिमी उत्तर प्रदेश में सबसे अधिक 16 सीटों पर सपा की दावेदारी होगी. लेकिन इसके अनुसार सीटों का बंटवारा संभव नहीं है. यह इलाका बसपा का गढ़ है और बसपा सबसे अधिक सीटों पर दावेदारी भी यहीं पर कर रही है.

सियासी गलियारों में चर्चा है कि पिछले चुनाव में जिस सीट पर जो दल जीता या दूसरे नंबर पर रहा, उसके खाते में ही वह सीट होगी. यदि इस फार्मूले को ही बंटवारे का आधार मानकर 2014 में हुए लोकसभा चुनाव पर नजर दौड़ाएं तो पश्चिमी उत्तर प्रदेश की 28 लोकसभा सीटों में से तीन सीटें फिरोजाबाद, मैनपुरी और बदायूं सपा जीती थी और 25 सीटों पर भाजपा ने जीत हासिल की थी. बसपा एक भी सीट नहीं जीत सकी थी. नौ सीटों पर बसपा के प्रत्याशी दूसरे नंबर पर रहे थे और 13 सीटों पर सपा के प्रत्याशी दूसरे नंबर पर रहे थे.

सहारनपुर और गाजियाबाद लोकसभा सीटों पर कांग्रेस के प्रत्याशी दूसरे नंबर पर रहे थे. रालोद सिर्फ मथुरा लोकसभा सीट पर ही मुख्य लड़ाई में आ सकी थी और यहां जयंत चौधरी दूसरे नंबर पर रहे थे, हालांकि वह भी 3.30 लाख के बड़े अंतर से हारे थे. अपने गढ़ बागपत में रालोद मुखिया चौधरी अजित सिंह मुख्य लड़ाई में भी नहीं आ सके थे. बसपा सुप्रीमो मायावती के गृह जनपद में भी बसपा मुख्य लड़ाई में नहीं रही थी. दोनों ही पार्टी के बड़े नेताओं की मानें तो इस फार्मूले के आधार पर दोनों दलों में सीटों का बंटवारा नहीं होगा. पश्चिमी उत्तर प्रदेश में बड़ी संख्या में बसपा के प्रत्याशी मैदान में होंगे और शीघ्र ही सीटें भी तय कर उनकी सूची जारी कर दी जाएगी.

स्रोत: palpalindia.com

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