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सभी राजनीतिक दलों ने कुड़मियों को ठगा, सुदेश और रामटहल सबसे ज्यादाः शीतल ओहदार (देखें इंटरव्यू)

१ फ़रवरी, २०१८ १:२४ पूर्वाह्न
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सभी राजनीतिक दलों ने कुड़मियों को ठगा, सुदेश और रामटहल सबसे ज्यादाः शीतल ओहदार (देखें इंटरव्यू)

Ranchi : झारखंड में कुड़मी राजनेताओं, विधायकों, सांसदों और मंत्रियों ने समाज के लोगों को ठगने का काम किया है. समाज को एक वोट बैंक की तरह इस्तेामाल किया है, लेकिन अब ऐसा नहीं होगा. झारखंड के टोटेमिक कुड़मियों को आदिवासी में शामिल नहीं किया गया तो उन्हें इसका खामियाजा भुगतना पड़ेगा. यह बात कुड़मी विकास मोर्चा के केंद्रीय अध्यक्ष शीतल ओहदार ने newswing.com के संवाददाता Pravin kumar और Subash shekhar के साथ खास बातचीत में कहा.

न्यूज विंगः किस आधार पर कुड़मी को आदिवासी दर्जा देने की मांग कर रहे हैं ?

न्यूज विंगः आजादी के 70 साल बाद आज इस लड़ाई की जरूरत क्यों पड़ी, जबकि झारखंड में कुड़मी समाज काफी सशक्त है ?

न्यूज विंगः क्या कुड़मियों के अधिकार के लिए समाज से चुने गये जन प्रतिनिधि, केंद्र सरकार और राज्य सरकार पर दबाव बना पा रहे हैं ?

न्यूज विंगः अभी भी झारखंड में दो कुड़मी सांसद रामटहल चौधरी और विद्युत वरण महतो हैं. क्‍या इन्होंने भी कुडमी समाज के लिए आगे बढ़कर सहयोग नहीं किया ?

न्यूज विंगः पिछले लोकसभा चुनाव में आजसू को कुड़मियों की पार्टी के रूप में स्थापित करने की मुहिम चली थी. क्या उसी तरह आप भी समाज के मुद्दे राजनीतिक गलियारों में इस्तेमाल किए जाएंगे या आपकी कोई ठोस रणनीति है?

न्यूज विंगः कुड़मी समाज झारखंड में कितना महत्वपूर्ण है ? यह समाज सत्ता को कितना प्रभावित कर सकता है ?

न्यूज विंगः तेली समाज को लेकर भी राजनीति हो रही है. वो भी आदिवासी सूची में आना चाहते हैं. सीएम भी उन्हे आश्वासन देते नजर आ रहे हैं ?

यह भी पढ़ें: मोमेंटम झारखंड के एक सालः इसे बरसी कहेंगे या सालगिरह ! सरकारी दावाः हुआ करोड़ों निवेश, राजनीतिक पार्टियां और बिजनसमैन: हाथी उड़ने की बजाय जमीन पर गिरा

स्रोत: newswing.com

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