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स्मार्ट सिटी का वादा और यहां की बस्ती की हालत सुदूरवर्ती इलाकों से भी बदतर, जान जोखिम में डालकर पार करते हैं पुलिया (देखें वीडियो)

५ जनवरी, २०१८ ४:३४ पूर्वाह्न
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स्मार्ट सिटी का वादा और यहां की बस्ती की हालत सुदूरवर्ती इलाकों से भी बदतर, जान जोखिम में डालकर पार करते हैं पुलिया (देखें वीडियो)

Ranchi : उन्हें तो पता भी नहीं है कि वे उस शहर में रहते हैं, जो राज्य की राजधानी कहलाती है. सुविधा का लाभ तो बस एक सपना है उनके लिए. आस लगाए वर्षों से बैठे हैं कि बस एक छोटी सी पुलिया बन जाती तो कम से कम जान हथैली पर रखकर उसे पार नहीं करना पड़ता.

बात राजधानी रांची की है, जहां बड़ी-बड़ी घोषणाएं होती हैं. स्मार्ट सिटी बनाने से लेकर अंतिम व्यक्ति तक सरकारी सुविधाओं को पहुंचाने का दम भरा जाता है. लेकिन जब रांची के वार्ड नंबर 52 के हुंडरू नदी दीपा बस्ती पर एक नजर डालेंगे तो यहां सिर्फ अंधेरा ही नजर आयेगा. सरकारी घोषणाएं और विकास की पोल खुल जाएगी. सचिवालय (नेपाल हाउस) से महज दो किलोमीटर की दूरी पर स्थित इस बस्ती की बदहाली को देख ऐसा लगेगा कि राजधानी रांची के इस टोला में विकास पहुंचने में और भी कई वर्ष लग जायेंगे.

इस आदिवासी बस्ती में लगभग 50 घर है, जो कमोबेश सरकारी हर सुविधाओं से वंचित है. इनकी जिंदागी सुदूरवर्ती इलाकों से भी बदतर है. यहां के लोगों को हर एक जरुरत के लिए जान जोखिम में डालना पड़ता है. बजार, दुकान, स्कूल आदि सभी कामों के लिए टुटी हुई बांस की पुलिया के सहारे ही एक पार से दूसरी पार जाना पड़ता है. पुलिया के नीचे बहने वाले नाले का पानी आठ फिट गहरा है. बस्ती के लोग कहते हैं कि हर वक्त डर लगा रहता है कि कहीं कोई उस गहरे नाले में गिर ना जाये.

लच्छु कच्छप कहते हैं कि बस्ती में किसी बाहरी आदमी को देखने पर लोगों की उम्मीद बढ़ जाती है. उन्हें लगने लगता है कि कोई पुलिया बनवाने आया है. लच्छु बताते हैं कि विधायक नवीन जायसवाल इलेक्शन के समय यहां आए थे. उन्होंने वादा किया था कि हमको वोट दीजिए, अगर हम जीत गये तो पुल को बनावा देंगे साथ ही जीतने के सात दिनों के अंदर ही बस्ती में बिजली का पोल भी लगवा देंगे. लेकिन उसके बाद एक भी बार उनके दर्शन तक नहीं हुए. सड़क, बिजली और पानी के बारें में पूछने पर बुर्जर्ग रामू लकड़ा बताते हैं कि हमलोग शहर की रौशनी को ही देखकर संतोष कर लेते हैं. बिजली तो बस्ती में कभी देखी ही नहीं, और सड़क के नाम पर यहां खेत केयारी है. एक ही चापाकल है जिसके खराब होने पर दो किलोमीटर दूर से पानी लाना पड़ता है. शौच के लिए भी हमलोग को खेत या नदी के किनारे जाना पड़ता है. सड़क के लिए रास्ता तक देने को हमलोग तैयार हो गए थे, लेकिन फिर भी किसी ने इसके लिए कोई पहल नहीं की और ना ही किसी को हमारी स्थिति पर दया आयी.

छात्र दिपक लकड़ा का कहना है कि आठ वर्ष पहले बस्ती में ही चंदा कर बांस, बल्ली से पुलिया बनायी गयी थी, जो आजतक हमलोगों को शहर से जोड़कर रखे हुये है. लेकिन बरसात में पुलिया पूरी तरह से डुब जाती है, यहां तक कि खेत में इस नदीं का पानी उतर आता है. इस दौरान हमलोग शहर से कट जाते हैं. ऐसे में हमारी किसी भी तरह की जरुरत पूरी नहीं हो पाती है. पुलिया बनाने के नाम पर पार्षद और विधायक सिर्फ आश्वासन ही देते हैं. वहीं नौवी की छात्रा पूजा कच्छप कहती हैं कि पुलिया पार करने के दौरान डर से हांथ-पांव कांपने लगते हैं. हमारे छोटे भाई बहन उस रास्ते से स्कूल जाने के लिए तैयार नहीं होते हैं, क्योंकि उन्हें भी डर लगता है कि कहीं पुल पार करते वक्त वो नाले में गिर ना जाये.

हुंडरू नदी दीपा बस्ती के अलावा एक और बस्ती है जिसका नाम छोटा घाघरा बस्ती है. इन दोनों जगह के लोगों के लिए शहर जाने का माध्यम यही टुटी हुई बांस की पुलिया ह.। इससे प्रतिदिन लगभग हजार लोग आना जाना करते हैं. वहीं बस्ती की रहने वाली किरन कुजूर बताती हैं कि छोटे-छोटे बच्चें जब पुलिया पार करते हैं, तब हमेशा डर लगा रहता है कि वो गिर ना जाये. इसलिए स्कूल भेजने के समय मैं खुद उन्हें पार कराती हूं. लेकिन स्कूल से आने के वक्त बच्चें अकेले ही खुद खतरनाक पुल को पार करके आते हैं. वहीं अगर बस्ती में किसी की भी तबीयत खराब होती है तो इलाज के लिए शहर जाने में बहुत परेशानी होती है. बुर्जुग महिला सोहदारी कच्छप बताती हैं कि एक बार पुलिया पार करने के क्रम में मैं गिर चुकी हूं. जिसके बाद बस्ती वालों ने मुझे बचाया. अगर बस्ती वाले पहुंचने में थोड़ी देर कर देते तो शायद में अपना दम ही तोड़ देती.

जब इस बदहाली की वजह विधायक नवीन जयसवाल से न्यूजविंग ने जानने की कोशिश कि तो उनका दोनों मोबाइल फोन लगातार ऑफ मिला. लेकिन कुछ देर के बाद वापस फिर से कॉल करने पर उनसे बात हुयी. उन्होंने इस मामले को लेकर कहा कि अगर बस्ती वाले जमीन देंगे तो पुलिया जरूर बनेगी. बाकि समस्याओं के लिए लोग आवेदन दें उसे भी हल किया जाएगा. जबकि वार्ड पार्षद अभी तक पुलिया बनवाने की कोशिश ही कर रही हैं. वार्ड की पार्षद पूष्पा तिर्की ने कहा कि बस्ती में बिजली के लिए पोल गिरना शुरु हो गया है. जमीन का मैटर खत्म होगा तभी विकास का काम शुरू होगा. फिलहाल पुल बनवाने की के लिए टेम्पोरोरी कोशिश की जा रही है. इसके लिए जल्द ही योजना डाल दी जाएगी.

स्रोत: newswing.com

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