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संयुक्त राष्ट्र के प्रतिबंधों का उल्लंघन किया सिंगापुर की दो कंपनियों ने

१३ मार्च, २०१८ ६:३० पूर्वाह्न
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संयुक्त राष्ट्र की एक रिपोर्ट लीक हुई है जिससे ये पता चला है कि सिंगापुर की दो कंपनियों ने उत्तर कोरिया को लक्ज़री उत्पाद बेचकर संयुक्त राष्ट्र के प्रतिबंधों का उल्लंघन किया है.

फ़ाइनल रिपोर्ट संयुक्त राष्ट्र की सुरक्षा परिषद को दे दी गई है और इस हफ़्ते के आखिर में प्रकाशित हो सकती है.

सिंगापुर की सरकार ने कहा है कि उसके संज्ञान में ये बात है और उसे मिली पुख़्ता जानकारियों के आधार पर जांच शुरू कर दी है.

संयुक्त राष्ट्र और सिंगापुर दोनों ने ही उत्तर कोरिया को लग्ज़री उत्पाद बेचने पर प्रतिबंध लगा रखा है.

उत्तर कोरिया के ख़िलाफ़ पिछले 2 साल से दुनिया भर में सख्ती से प्रतिबंध लगाए गए हैं क्योंकि उसने परमाणु और मिसाइल परिक्षण जारी रखे हुए हैं.

कहा जा रहा है कि अमरीका के राष्ट्रपति डोनल्ड ट्रंप और उत्तर कोरिया के नेता किम जोंग उन के बीच मुलाक़ात जल्द होगी लेकिन अभी संयुक्त राष्ट्र के लगाए गए प्रतिबंध जारी रहेंगे.

जानकारों का कहना है कि अगर सिंगापुर की कंपनियों पर लगे आरोप साबित होते हैं तो ये सवाल पैदा करता है कि पूरे एशिया में इस तरह के कितने उल्लंघन हो रहे होंगे.

इस रिपोर्ट में एशिया की दूसरी कंपनियों के अलावा सिंगापुर की दो कंपनियों के नाम हैं.

आरोप है कि जुलाई 2017 तक ये कंपनियां उत्तर कोरिया को लक्ज़री उत्पाद जैसे वाइन और स्पिरिट बेचती रहीं.

संयुक्त राष्ट्र ने 2006 से उत्तर कोरिया को कोई भी लग्ज़री उत्पाद बेचने पर पाबंदी लगा रखी है और ऐसा करना ग़ैर-क़ानूनी है. सिंगापुर में भी कई सालों से ऐसा कानून है.

इन दो कंपनियों के नाम हैं – ओसिएन और टी स्पैशलिस्ट. ये दोनों ही कंपनियां आपस में जुड़ी हुई हैं और इन दोनों का निदेशक भी एक ही है.

इस रिपोर्ट में कहा गया है कि 2011 से 2014 के बीच उत्तर कोरिया में दोनों कंपनियों के बैंक खाते और सिंगापुर में टी स्पैशलिस्ट के बैंक खातों के बीच लगभग 2 करोड़ डॉलर का लेन-देन दर्ज है.

सिंगापुर के विदेश मंत्रालय के मुताबिक सिंगापुर ने अपने बैंकों पर उत्तर कोरिया के साथ किसी भी व्यापार के लिए आर्थिक मदद दिए जाने पर भी पाबंदी लगा रखी है.

टी स्पैशलिस्ट कंपनी ने संयुक्त राष्ट्र के सामने बयान दिया है कि उसके पास उत्तर कोरिया से फंड नहीं आया ब्लकि हांग कांग की एक रजिस्टर्ड कंपनी से आया है और 2012 से पहले के एक व्यापार से संबंधित है.

संयुक्त राष्ट्र का आरोप ये भी है कि इन दोनों कंपनियों के लंबे समय तक उत्तर कोरिया के रायजयोंग बैंक से करीबी संबंध रहे हैं. इस बैंक पर अमरीका ने 2017 में प्रतिबंध लगाए थे.

इन दोनों कंपनियों का कहना है कि उनका इस बैंक से कोई लेना-देना नहीं है.

कंपनियों के वकील एडमंड परेरा ने पुष्टि की है कि सिंगापुर प्रशासन जांच कर रहा है लेकिन इन कंपनियों का उत्तर कोरिया से फिलहाल कोई व्यापारिक या कोई और संबंध नहीं है.

वकील परेरा ने माना कि कंपनियों ने उत्तर कोरिया में व्यापार किया है लेकिन संयुक्त राष्ट्र के प्रतिबंध लगाए जाने से पहले.

साथ ही उन्होंने कहा कि कंपनियों ने उत्तर कोरिया में अपना काम धीरे-धीरे घटा लिया लेकिन इसमें वक्त लगता है.

वकीलों का कहना है कि दिक्कत ये है कि कंपनियों से ये उम्मीद की जाती है कि वो इन प्रतिबंधों को लागू करें जबकि कानून में हो रहे बदलावों के बारे में ज़्यादातर उन्हें पता नहीं रहता है.

पिछले साल नवंबर में ही सिंगापुर ने उत्तर कोरिया के साथ व्यापार को पूरी तरह प्रतिबंध किया है. इससे पहले थोड़े-बहुत व्यापार की अनुमति थी.

संयुक्त राष्ट्र की रिपोर्ट दावा करती है कि दोनों कंपनियों ने उत्तर कोरिया के साथ किए इस विवादास्पद व्यापार में सिंगापुर के बैंकों की भी मदद ली है.

इस रिपोर्ट में ये भी कहा गया है कि ये संयुक्त राष्ट्र के सदस्य देशों की ज़िम्मेदारी है कि उनके बैंक अपने ग्राहक व्यक्तियों और कंपनियों के लेन-देन पर सख्त नज़र रखें.

बीबीसी ने इन दोनों बैंकों से बात करनी चाही जिनका ज़िक्र इस रिपोर्ट में है लेकिन दोनों ने बैंकों के गोपनियता कानून का हवाला देकर बात करने से मना कर दिया.

मॉनेटरी अथॉरिटी ऑफ़ सिंगापुर (एमएएस) ने बीबीसी को बताया कि वो इन मामलों में संयुक्त राष्ट्र की मदद कर रही है.

संयुक्त राष्ट्र के एक्सपर्ट पैनल के पूर्व सदस्य विलियम न्यूकॉम्ब ने कहा कि सिस्टम में इस तरह की कमियों का ही उत्तर कोरिया फ़ायदा उठाता है.

“वे एक फर्ज़ी कंपनी बनाते हैं, किसी और जगह कोई और कंपनी बनाते हैं, किसी तीसरी जगह पर बैंक होता है, और किसी और जगह पर व्यापार करते हैं.”

“इसके अलावा अब कानून के दायरे भी अलग-अलग हैं. इसकी वजह से ये और जटिल हो जाता है और इसी का इस्तेमाल वे प्रतिबंधों के उल्लंघन के लिए करते हैं.”

आर्थिक अपराधों के जानकार कहते हैं कि बैंको का इस तरह के उल्लंघनों को पकड़ पाना मुश्किल होता है.

डिलॉएट फाइनेंशियल क्राइम नेटवर्क के टिम फिलिप्स का कहना है कि आपको शायद कभी ना पता चले कि पैसा उत्तर कोरिया से आ रहा था.

उनका कहना है कि दक्षिण पूर्व एशिया में ये समस्या ज़्यादा बड़ी हो सकती है.

“फिलहाल इस माहौल में अगर किसी का नाम रिपोर्ट में है तो एमएएस अपने यहां हुए लेन-देन का पूरा इतिहास छान सकता है लेकिन दक्षिण पूर्व एशिया के दूसरे देशों में तो उनके सिस्टम इतने परिपक्व भी नहीं है कि इस तरह के अपराधों की रोकथाम हो सके.”

संयुक्त राष्ट्र की रिपोर्ट इस मुद्दे को भी चिन्हित करती है कि इन कंपनियों ने उत्तर कोरिया के साथ व्यापार करने के लिए सिंगापुर जैसे मज़बूत सिस्टम में भी कमियां ढूंढ निकाली.

स्रोत: legendnews.in

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