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सेवा के नाम पर लोगों को ठग रही टाटा एआईजी, उपभोक्ता फोरम पहुंच रहे पीडि़त

२१ नवंबर, २०१८ १२:२८ अपराह्न
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सेवा के नाम पर लोगों को ठग रही टाटा एआईजी, उपभोक्ता फोरम पहुंच रहे पीडि़त

जबलपुर. बीमा सेवा के नाम पर लोगों को योजनाओं के सब्जबाग दिखाकर किस तरह से ठगी की जाती है इसकी बानगी बीमा कंपनियों की कथनी और करनी में फर्क से मिल रही है. जबलपुर उपभोक्ता फोरम में ऐसी कंपनियों के खिलाफ आए दिन मामलों की संख्या बढ़ती जा रही है. विज्ञापनों पर छाई रहने वाली बीमा कंपनियां किस तरह लोगों के विश्वास का मखौल उड़ाती हैं इसकी बानगी फोरम के प्रकरणों से मिल रही है. ऐसी ही बीमा कंपनियों में से एक टाटा एआईजी के विरुद्ध शहर और प्रदेश के अन्य फोरमों में अनेकों प्रकरण विचाराधीन हैं. बीमा कंपनी किस तरह से लोगों के साथ विश्वासघात कर रही है इसकी बानगी शहर के व्यवसायी राजीव सिंह द्वारा टाटा एआईजी इंश्योरेंस कंपनी के विरुद्ध दायर प्रकरण दे रहा है. श्री सिंह के अधिवक्ता नितिन पटेल ने उक्त जानकारी देते हुए कहा कि सोमवार को उपभोक्ता फोरम द्वारा विगत 9 माह से प्रकरण में हीला हवाली कर रही टाटा एआईजी कंपनी की कार्यशैली को गंभीरता से लेते हुए उन्हें 10 दिनों के भीतर जवाब देने का अल्टीमेटम दिया है.

अधिवक्ता श्री पटेल ने बताया कि शहर के बिलहरी निवासी राजीव सिंह ने इस उम्मीद से अपनी कार का बीमा कराया था कि वक्त मौके पर बीमा सेवाओं का लाभ टाटा एआईजी से मिलेगा लेकिन ऐसा नहीं हुआ. 26मार्च को अचानक बीच राह में पत्थर आ जाने की वजह से श्री सिंह की कार अचानक बंद हो गई. उन्होंने तत्काल इसकी सूचना टाटा एआईजी कंपनी के टोल फ्री नंबर पर दी लेकिन काफी प्रयासों के बाद भी कंपनी ने बीमा में दी गई फ्री पिक अप सर्विस के अनुसार नहीं उठवाई. कंपनी ने कहा वाहन किसी तरह स्प्लेंडिड होंडा सर्विस स्टेशन तक पहुंचा देवे जो भी खर्च आएगा कंपनी देगी. इसके बाद श्री सिंह का वाहन किसी तरह सर्विस स्टेशन पहुंच तो गया लेकिन 9 माह बाद भी गाड़ी में रत्ती भर का सुधार कार्य नहीं हो पाया. कंपनी से लगातार फोन और ईमेल के माध्यम से संपर्क करने पर श्री सिंह को कोई सकारात्मक जवाब नहीं मिल पाया. कंपनी के सर्वेयर रवि महाजन ने गाड़ी के सुधार के नाम पर जहां लगभग 47 हजार रुपए का एस्टीमेट खर्च बताया वहीं स्पलैंडिड होंडा ने एस्टीमेट के नाम पर 1 लाख 35 हजार रुपए से अधिक का खर्च बताया. हैरानी की बात ये है कि श्री सिंह के अनुसार वाहन 9 माह बाद भी रत्ती भर भी सुधार कार्य नहीं हुआ है. बीमा कंपनी के विश्वासघात से प्रताडि़त महसूस कर रहे श्री सिंह ने इसी वजह सेे अधिवक्ता के माध्यम से फोरम की शरण ली.

श्री सिंह के अधिवक्ता श्री पटेल ने बताया कि फोरम के समक्ष सोमवार को अनेक प्रकरणों के दस्तावेज प्रस्तुत कर बताया गया कि टाटा एआईजी सिर्फ शहर में नहीं बल्कि समूचे देश में इसी तरह लोगों के साथ ठगी कर रही है. कंपनी पॉलिसी लेने के समय तो उपभोक्ताओं को योजनाओं के सब्जबाग दिखाती है लेकिन जब कोई पॉलिसी का लाभ उठाने की बात कहे तो मुकर जाती है जिससे पीडि़तों को फोरम और न्यायालयों की शरण लेनी पड़ती है. फोरम ने इस बात के साथ ही विगत 8 माह से कंपनी के द्वारा प्रकरण में जवाब देने में की जा रही हीला-हवाली को देखते हुए उन्हें सफाई देने अंतिम अवसर दिया है.

स्रोत: palpalindia.com

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