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हरनमौला फनकार पीयूष मिश्रा ने बताया- कई नाकामियों के बावजूद क्यों नहीं छोड़ी फिल्म इंडस्ट्री

१२ नवंबर, २०१७ ३:२४ अपराह्न
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पीयूष मिश्रा ने अपने गीत 'जब शहर हमारा सोता है...', 'एक बगल में चांद होगा...' और 'आरंभ है प्रचंड...' से समां बांधा।

साहित्य आजतक, 2017 के अंतिम दिन पहले सत्र में गीतकार और अभिनेता पीयूष मिश्रा ने शिरकत की। उन्होंने अपने सुमधुर गीतों से शुरुआत की। मिश्रा ने अपने गीत ‘जब शहर हमारा सोता है…’, ‘एक बगल में चांद होगा…’ और ‘आरंभ है प्रचंड…’ से समां बांधा। मिश्रा ने अपनी कविताओं का भी पाठ किया। उन्होंने ‘क्यों आते हो अंकल मुझको डर लगता है’ पढ़ी। मिश्रा ने अपने प्रिय म्यूजिक डायरेक्टर ओपी नैयर के नाम भी एक गाना गाया. जिसके बोल थे ‘ऐसा तो होता है।’ आज ही भारतीय जनता पार्टी (भाजपा) के सांसद और अभिनेता शत्रुघ्न सिन्हा ने इसी प्रोग्राम के मंच से मौजूद राजनीतिक हालात पर कहा कि देश में जो माहौल चल रहा है, उसमें सभी ‘खामोश’ हैं। अपने ‘खामोश’ डायलॉग पर सिन्हा ने कहा ‘अब लगता है कि हम सब खामोश हो गए हैं।’ साहित्य आजतक के तीसरे और अंतिम दिन शत्रुघ्न सिन्हा ने कहा, “मैंने अपनी किताब सबसे पहले राष्ट्रपति रामनाथ कोविंद को दी। प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी को इसलिए नहीं दे सका, क्योंकि तब तक यह आई नहीं थी।”

स्रोत: jansatta.com

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