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होम लोन लेने वालों के लिए खुशखबरी, एक लोन कैटेगरी में कर्इ बेंचमार्क का इस्तेमाल नहीं होगा

६ दिसंबर, २०१८ १०:४७ पूर्वाह्न
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होम लोन लेने वालों के लिए खुशखबरी, एक लोन कैटेगरी में कर्इ बेंचमार्क का इस्तेमाल नहीं होगा

नई दिल्ली. आम लोगों के लिए अच्छी खबर है. होम लोन, ऑटो लोन की दरों में पारदर्शिता लाने के मकसद से भारतीय रिजर्व बैंक बड़ा कदम उठाने जा रहा है. ग्राहकों की शिकायतों को देखते हुए रिजर्व बैंक (आरबीआई) ने बुधवार को कहा कि पर्सननल लोन, होम लोन, कार लोन और एमएसएमई कर्ज पर ‘फ्लोटिंग’ (परिवर्तनीय) ब्याज दरें अगले साल एक अप्रैल से रेपो रेट या सरकारी प्रतिभूतियों में निवेश पर प्रतिफल जैसे बाहरी मानकों से संबद्ध की जाएंगी. आरबीआई अब मौजूदा आंतरिक बेंचमार्क की जगह अब फ्लोटिंग दर के लिए बाहरी बेंचमार्क का प्रयोग करना अनिवार्य कर दिया है. यह बाहरी में बेंचमार्क निम्नलिखित में से कोर्इ एक होंगे. इसमें पहला, फाइनेंशियल बेंचमार्क इंडिया प्राइवेट लिमिटेड (एफबीआर्इएल) द्वारा बनाया गया भारत सरकार का 91 दिनों का ट्रेजरी बिल, एफबीआर्इएल द्वारा बनाया गया भारत सरकार का 182 दिनों का ट्रेजरी बिल या फिर एफबीआर्इएल का बेंचमार्क मार्केट इंटरेस्ट रेट.

आरबीआर्इ के इस फैसले के बाद बैंक अपने हिसाब से केवल मामूली बदलाव ही कर सकते हैं. लेकिन यदि किसी ने लोन ले लिया है तो बैंक बाद में कोर्इ बदलाव नहीं कर सकता है. जनक राज की अध्यक्षता वाली एक कमेटी ने फ्लोटिंग लोन रेट में बाहरी बेंचमार्क इस्तेमाल करने का सुझाव दिया है. मौजूदा समय में में प्राइम लेंडिंग रेट (पीएलआर), बेंचमार्क प्राइम लेंडिंग रेट (बीपीएलआर), बेस रेट और मार्जिनल कॉस्ट ऑफ फंड्स बेस्ड लेंडिंग रेट (एमसीएलआर) का प्रयोग किया जाता है. साथ ही पारदर्शिता व लोन उत्पाद के स्टैंडर्ड को बनाए रखने के लिए लोन कैटेगरी के अंतर्गत एक समान बाहरी बेंचमार्क को अपनाना होगा. दूसरी तरह इसे समझें तो एक बैंक एक ही लोन कैटेगरी में कर्इ बेंचमार्क का इस्तेमाल नहीं कर सकता है.

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स्रोत: palpalindia.com

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