अजीत अंजुम:दो पैर, बारह हाथ.. किसी मंत्री का ऐसा वीडियो पहली बार आया है, ये कैसी 'सेवा' है!

१९ नवंबर, २०१७ ९:१४ अपराह्न

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अजीत अंजुम:दो पैर, बारह हाथ.. किसी मंत्री का ऐसा वीडियो पहली बार आया है, ये कैसी 'सेवा' है!

मुद्दा. योगी सरकार के कैबिनट मंत्री नंदगोपाल नंदी का एक वीडियो वायरल हो रहा है. कई बार नेता अपने पार्टी के कार्यकर्ताओं से क्या-क्या करवाते हैं या कार्यकर्ता अपने नेताजी को खुश करने के लिए क्या -क्या करने को मजबूर होते हैं , इसकी मिसाल है ये वीडियो. इस वीडियो में योगी सरकार के मंत्री नंदी साहब लेटे हुए हैं. सिरहाने में बीजेपी के विधायक हर्ष वाजपेयी बैठे हैं. हर्ष वाजपेयी पास ही खड़े बीजेपी कार्यकर्ताओं से मंत्री जी के कार्यक्रमों के बारे में जानकारी ले रहे हैं. बाकी बचे कार्यकर्ता मंत्री जी के पांव दबाने में लगे हैं. या कहें फुट मसाज करने में लगे हैं. एक साथ कई हाथ मंत्रीजी के थके पांव की मालिश कर रहे हैं. मंत्री जी चैन से लेटे हैं.आंखें बंद हैं. या तो परम आनंद की अवस्था में हैं. या फिर नींद आने , न आने बीच झूलते हुए मसाज का आनंद ले रहे हैं. पैर दो हैं. हाथ बारह. दो आंखे, बारह हाथ नहीं. दो पैर, बारह हाथ. देखकर ये समझा जा सकता है कि मंत्री को अपने कार्यकर्ताओं से ऐसी सेवा करवाने की आदत है. उनकी नजर ए इनायत पाने के लिए मजबूर कार्यकर्ताओं को भी मंत्रीजी के इस शौक का पता है, तभी तो पैर दबाने का मौका कोई छोड़ना नहीं चाहता. क्या नियति है इन कार्यकर्ताओं की, जरा सोचिए. क्या मिजाज ऐसे नेताओं का, ये भी समझिए. सामंती दौर अब भले न हो, मिजाज सामंती है. दसवीं पास एक शख्स अपनी ‘धंधेबाज बुद्दि’ से मुफलिसी को फतह करते हुए कैसे मंत्री बन जाता है, कैसे हर पार्टी से टिकट पा जाता है, कैसे इतना बड़ा साम्राज्य खड़ा कर लेता है कि एक विधायक सिरहाने में बैठे और कार्यकर्ता पैर दबाएं, ये अपने -आपमें एक सनसनीखेज कहानी है. गलियों में घूमने वाले आवारा लड़के के अरबपति नंदी बनने की कहानी.

कहा जा रहा है कि वीडियो इलाहाबाद का है, जहां से नंदी की पत्नी अभिलाषा मेयर का चुनाव लड़ रही हैं. नंदी साहब अपने लाव -लश्कर के साथ अपनी बेगम साहिबा के प्रचार में पहुंचे थे. थक गए तो सुस्ताने लगे. अब नंदी साहब सुस्ताएं तो कार्यकर्ता पैर न दबाएं, ऐसा कैसे हो सकता है? तो जो हो रहा है, नजारा सामने है. साहेब बहादुर लेटे हैं. आंख बंद है या फिर सोए हुए साहेब की सेवा करके भी सब अपना नाम दर्ज करवाने में जुटे हैं... हमने भी दबाया.. हमने भी दबाया...कार्यकर्ताओं की तो मजबूरी समझ में आती है लेकिन इस मंत्री का क्या कहें..? जिसकी नजर में कार्यकर्ताओं की औकात मालिश करने वाले जैसी हो जाए... लानत है.

नंदगोपाल नंदी अपने कारनामों के लिए पहले भी काफी कुख्यात-विख्यात रहे हैं. कई तरह के कारोबार हैं उनके. सभी कारोबारों का ब्रांडनेम है ‘नंदी’. अरबपति -उद्योगपति नंद गोपाल गुप्ता उर्फ नंदी योगी सरकार में स्टाम्प और नागरिक उड्डयन मंत्री हैं. 2007 में मायावती की पार्टी से विधायक थे. मंत्री भी बने. 2012 में चुनाव हार गए. फिर 2014 का लोकभा चुनाव कांग्रेस लड़े. फिर हार गए तो इस चुनाव से पहले बीजेपी में आ गए. दम-खम के बूते चुनाव भी जीते और मंत्री भी बने. पत्नी अभिलाषा गुप्ता नंदी इलाहाबाद की मेयर हैं. ये तो है उनका सियासी परिचय.

अब जरा एक गरीब नंदी के अरबपति नंदी की कहानी सुनिए. गूगल पर उनके बारे में जानकारियां तलाशते हुए पता चला कि नंदी साहब किसी जमाने में बहुत गरीब थे. पढ़ने में उनकी कोई दिलचस्पी नहीं थी. किसी तरह दसवीं पास कर पाए. फिर उन्होंने पचास पैसे लेकर फिल्में दिखाने का काम का काम शुरु किया. इलाहाबाद के बहादुरगंज की गलियों में बच्चों को ब्लैक एंड व्हाइट टीवी पर पचास पैसे लेकर फिल्में दिखाते थे. उसी दौरान उन्हें पड़ोस में रहने वाली अभिलाषा से प्यार हुआ. घर वालों की रजामंदी के बगैर शादी की. उनके प्यार की कहानियां गूगल पर तो मौजूद है लेकिन पचास पैसे लेकर गलियों फिल्म दिखाने वाले दसवीं पास नंदी करोड़ो के मालिक कैसे हो गए , गूगल इसकी जानकारी नहीं देता. लेकिन उनके जबरदस्त ग्रोथ को देखकर इतना तो अंदाजा लगाया ही जा सकता है, बहुत ‘प्रतिभा संपन्न’ रहे होंगे, तभी बहुत कम समय में सौ करोड़ पार गए. चुनाव भी लड़ गए. जीतकर मंत्री भी बन गए. माया सरकार में भी मंत्री रहे. योगी सरकार में भी मंत्री हैं. बीच में कांग्रेस में भी हो लिए. बायोडेटा देखते ही पता चलता है कि गजब की शख्सियत हैं नंदी साहब. न होते तो यहां तक पहुंच पाते. वो भी गलियों में घूमकर पचास पैसे में फिल्म दिखाते -दिखाते..बसपा और कांग्रेस से होते हुए बीजेपी पहुंचे नंदी का ये वीडियो बीजेपी के नेताओं को देखना चाहिए. हो सकता है उन्हें अपने कार्यकर्ताओं की हालत पर तरस आए. हो सकता है कि योगी जी को तरस आए. पार्टी को मजबूत करने के काम में जुटे कार्यकर्ताओं को नेताजी के पैरों की मालिश न करनी पड़े , ऐसा कोई विधान तो नहीं बन सकता लेकिन चेतावनी तो दी ही सकती है.

स्रोत: palpalindia.com

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