अधिकारों के लिए दिल्ली सरकार और एलजी के बीच जंग, आज संवैधानिक पीठ शुरू करेगी सुनवाई

२ नवंबर, २०१७ १:२० पूर्वाह्न

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अधिकारों के लिए दिल्ली सरकार और एलजी के बीच जंग, आज संवैधानिक पीठ शुरू करेगी सुनवाई

सुप्रीम कोर्ट की पांच सदस्यीय संवैधानिक पीठ में जस्टिस दीपक मिश्रा, जस्टिस एके सीकरी, जस्टिस ए एम खानविलकर, जस्टिस डीवाई चंद्रचूड़ और जस्टिस अशोक भूषण

नई दिल्ली: अधिकारों को लेकर दिल्ली सरकार बनाम उपराज्यपाल (लेफ्टिनेंट गवर्नर) मामले की सुनवाई सुप्रीम कोर्ट की पांच जजों की संवैधानिक पीठ में गुरुवार को शुरू होगी. सुप्रीम कोर्ट के मुख्य न्यायाधीश जस्टिस दीपक मिश्रा की अध्यक्षता वाली पांच सदस्यीय संवैधानिक पीठ इस मामले की सुनवाई करेगी. इस पांच सदस्यीय संवैधानिक पीठ में जस्टिस दीपक मिश्रा, जस्टिस एके सीकरी, जस्टिस ए एम खानविलकर, जस्टिस डीवाई चंद्रचूड़ और जस्टिस अशोक भूषण होंगे.

इसी साल फरवरी में अधिकारों को लेकर दिल्ली सरकार बनाम उपराज्यपाल मामले को सुप्रीम कोर्ट ने संवैधानिक पीठ को भेज दिया था. दिल्ली सरकार की याचिका पर सुनवाई करते हुए सुप्रीम कोर्ट की दो जजों की बेंच ने ये फैसला किया था. कोर्ट ने कहा था कि इस मामले से अहम संवैधानिक मुद्दे जुड़े हैं इसलिए मामले की सुनवाई संवैधानिक पीठ ही करेगी. सुप्रीम कोर्ट ने यह भी कहा था कि संवैधानिक पीठ किन मुद्दों पर सुनवाई करे, ये वही तय करेगी.

केजरीवाल सरकार ने दिल्ली हाई कोर्ट के फैसले को चुनौती दी है, जिसमें कहा गया है कि उपराज्यपाल राष्ट्रीय राजधानी दिल्ली के प्रशासनिक प्रमुख हैं और राजधानी के शासन में उनका फैसला अंतिम माना जाएगा.

दिल्ली सरकार का कहना है कि उपराज्यपाल मंत्रिमंडल की सलाह मानने को बाध्य हैं. लेकिन दिल्ली हाईकोर्ट ने फैसले में कहा कि उपराज्यपाल बाध्य नहीं हैं, उनकी सहमति और मंजूरी के बिना दिल्ली सरकार कोई फैसला नहीं ले सकती.

सुप्रीम कोर्ट की संवैधानिक पीठ ने इस मसले पर फैसला सुरक्षित रख लिया है जिसमें पीठ को तय करना है कि क्या कोर्ट में संविधान के अनुच्छेद 32 या अनुच्छेद 136 के तहत दाखिल याचिका पर कोर्ट संसदीय स्थायी समिति की रिपोर्ट को रेफरेंस के तौर ले सकती है और इस पर भरोसा कर सकती है? साथ ही क्या ऐसी रिपोर्ट को रेफरेंस के उद्देश्य से देखा जा सकता है और अगर हां तो किस हद तक इस पर प्रतिबंध रहेगा. ये देखते हुए कि संविधान के अनुच्छेद 105, 121, और 122 में विभिन्न संवैधानिक संस्थानों के बीच बैलेंस बनाने और 34 के तहत संसदीय विशेषाधिकारों का प्रावधान दिया गया है.

स्रोत: khabar.ndtv.com

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