कमलनाथ ने 'महाकाल' से की शिवराज सरकार की शिकायत, उज्जैन भिजवाया खत

१३ जुलाई, २०१८ ११:१८ पूर्वाह्न

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कमलनाथ ने 'महाकाल' से की शिवराज सरकार की शिकायत, उज्जैन भिजवाया खत

उज्‍जैन. विधानसभा चुनाव को लेकर प्रदेश में दोनों पार्टियां बीजेपी और कांग्रेस तेजी से सक्रिय हो रही हैं. सूबे के मुखि‍या शिवराज सिंह चौहान 14 जुलाई से जन आशीर्वाद यात्रा निकाल रहे हैं तो कांग्रेस के प्रदेश अध्‍यक्ष कमलनाथ ने महाकाल के नाम चिट्ठी लिखी है. चिट्ठी लेकर कमलनाथ खुद नहीं गए हैं, कार्यकर्ताओं ने मंदिर में जाकर पुजारी को सौंप दिया. खबर की मानें तो कमलनाथ ने इस चिट्ठी में शिवराज सरकार पर आरोप लगाए हैं और भगवान से प्रार्थना की जाएगी कि वो प्रदेश को बचा लें.

बता दें कि पांच साल पहले 2013 में शिवराज सिंह ने महाकाल मंदिर से ही अपना प्रचार अभियान शुरू किया था. कांग्रेस ने इन पांच सालों में सरकार के अधूरे वादों को इस चिट्ठी के जरिए महाकाल को जानकारी दी. कमलनाथ की ये चिट्ठी एक दिन बाद जनता के लिए सार्वजनिक कर दी जाएगी.

बता दें कि मध्य प्रदेश के मुख्यमंत्री शिवराज सिंह चौहान 14 जुलाई से जन आशीर्वाद यात्रा शुरू कर रहे हैं. उज्जैन में भगवान महाकाल की पूजा-अर्चना के बाद 14 जुलाई को भाजपा के राष्ट्रीय अध्यक्ष अमित शाह जन आशीर्वाद यात्रा को हरी झंडी दिखाएंगे. यह यात्रा राज्य के सभी 230 विधानसभा क्षेत्रों तक जाएगी. प्रत्येक विधानसभा क्षेत्र में मुख्यमंत्री की एक-एक सभा होगी तथा रथ सभाएं भी होगी.

मुख्यमंत्री की जन आशीर्वाद यात्रा 55 दिनों तक चलेगी. यात्रा के दौरान मुख्यमंत्री रथ और मंच सभाओं को मिलाकर लगभग 700 सभाओं को संबोधित करेंगे. यात्रा के लिए प्रदेश को दो भागों में बांटा गया है. यात्रा के संयोजक अजयप्रताप सिंह ने बताया कि एक भाग में विंध्य, बुंदेलखंड और महाकौशल को रखा गया है. दूसरे भाग में भोपाल, नर्मदापुरम, ग्वालियर-चंबल और मालवा-निमाड़ क्षेत्र हैं.

मिशन 2018 को जीतने के लिए कांग्रेस ने कमलनाथ को एमपी कांग्रेस की कमान सौंपी है. साथ ही सिंधिया को चुनावी प्रचार का ज़िम्मा सौंपा है. दूसरी तरफ शिवराज अपनी जन आशीर्वाद यात्रा के जरिए पचास दिनों में सूबे की पूरी 230 विधानसभा सीटों तक पहुंचेंगे. शिवराज की यात्रा का समापन पच्चीस सितंबर को पंडित दीनदयाल उपाध्याय की जयंती पर कार्यकर्ता महाकुंभ के रूप में होगा. कुल मिलाकर कांग्रेस हो या बीजेपी सभी को ये समझ आ गया है कि चुनाव मैनेजमेंट से नहीं बल्कि जनता के बीच पहुंचकर ही जीतना होगा. यही वजह है कि सत्ता हो या विपक्ष सब जनता का विश्वास जीतने में जुट गए हैं.

स्रोत: palpalindia.com

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