कर्नाटक में मिला दुर्लभ प्रजाति का पौधा, होगा कैंसर का इलाज

२२ मई, २०१५ ८:४५ पूर्वाह्न

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बेंगलूरू. राज्य के वैज्ञानिकों के एक दल ने दुर्लभ प्रजाति के ऎसे पौधे की खोज की है, जो कैंसर के इलाज में सक्षम हो सकता है. वैज्ञानिकों को यह पौधा पश्चिमी घाट में मिला है. इसे पौधे का वानस्पतिक नाम मिक्यूलिया डेंटेट बेड है. छोटी झाड़ी की तरह दिखने वाले इस पौधे में कैंप्टोथेसाइन (सीपीटी) नामक क्षारीय पदार्थ मिलता है, जो कैंसर रोधी होता है.

इंडियन जर्नल ऑन बायो टेक्नोलॉजी के ताजा अंक में प्रकाशित शोध पत्र में वैज्ञानिकों ने कहा है कि कैंप्टोथेसाइन एक महत्वपूर्ण कैंसर रोधी यौगिक है, जो एस्टेरिड क्लैड की विभिन्न प्रजातियों के पौधों से प्राप्त किया जाता है. सीपीटी से कई अर्ध कृत्रिम दवाएं जैसे हाइकैंपटिन (टोपोटिकैन) तथा कैंपटोस्टर (इरिनोटेकन या सीपीटी-11) प्राप्त किया गया है, जिसका इस्तेमाल अंडाशय तथा फेफड़े के कैंसर के इलाज में किया जा रहा है.

इस पौधे की खोज बेंगलूरू के अशोक पारिस्थितिकीय व पर्यावरणीय शोध संस्थान और बेंगलूरू व धारवाड़ कृषि विज्ञान विश्वविद्यालय के शोधकर्ताओं केे दल ने किया है. वैज्ञानिकों के मुताबिक यह पौधा राज्य के कोडुगू जिले के मडिकेरी इलाके के वनक्षेत्र में काफी तादाद में पाया जाता है. कॉफी उत्पादन के कारण इस इलाके को "भारत का ब्राजील" भी कहा जाता है.

मुख्य शोधकर्ताओं में से एक जी रविकांत ने कहा कि वे इस पौधे को बागवानी के जरिए उगाने के प्रयास कर रहे हैं. हमारे लिए इस पौधे की पैदावार बढ़ाना प्रमुख चुनौती है. शर्माने कहा कि हमारा उद्देश्य यह देखना है कि क्या देश में कैंपटोथेसिन को घरेलू और अंतरराष्ट्रीय बाजार की मांग पूरी करने के लिए पैदा किया जा सकता है? देश में सीपीटी पैदा करने वाले कई पौधे पाए जाते हैं, लेकिन नोथापोडाइट्स निमोनिआना जैसे पौधों की मांग के चलते इनकी इतनी कटाई हुई कि अब यह लुप्त होने के कगार पर पहुंच गए हैं.

स्रोत: palpalindia.com

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