करे साधुआ खेतवा ना बोवाई ?

२२ मई, २०१५ ८:४५ पूर्वाह्न

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करे साधुआ खेतवा ना बोवाई ?

हमारे गाँव स्वर्ग ......hahahahahaha ......i cant stop laughing ...... अबे सुरग तो अब कश्मीर भी न रहा ......यहां कहाँ आ गया सुरग ढूंढने बावले ....... अबे बावले यहां तो बजबजाती नालियां है ......दिन में मक्खियाँ और रात के मच्छर ....... गाँव के बाहर हर सड़क पे सिर्फ और सिर्फ एक ही चीज दिखती है ........ताजा मल ....... आ जा सूंघ ले .......

भोले भाले सीधे सादे .......oh my god ......rolling on the floor and laughing and laughing and laughing ......वाकई बड़े भोले हैं ......साले भोले न होते तो मायावती और मुलायम सिंग लालू को ही वोट देते ........ इतने सीधे हैं की चक्कर में फंस मत जाना कभी ....... चरस बो देंगे .......

दूध दही की नदिया नहीं अब तो नालियां बहती हैं .......per person availability आज भी 160 ग्राम ही है दूध की इस देश में. गाँव की 80 % जनता ऐसी जिसने पूरी जिंदगी में कभी एक लीटर दूध न पीया होगा पूरे जीवन में ....... black tea नसीब न होती अच्छे अच्छे बाबू साहब लोगों को.

पुराने जमाने में तो 4-6 बैल होते थे खूंटे पे और 4 - 6 गाय भैंस. उन्ही का चारा भूसा दाना पानी देख रेख ......अब न बैल न पशु न चारा ......साल में दो बार बुलवा लेते है ट्रेक्टर ........जोत दे भाई .......

पहले हल चलाता था अब मेढ़ पे बैठ के खाली time note करता है. पहले रहट चलाता था .......दोन चलाता था .......बैलों से पानी खींचता था कुए से ....... अब तो सिर्फ handle मारना है या सिर्फ बटन दबाना है. पहले कम से कम नाली देखनी पड़ती थी .....अब तो प्लास्टिक pipe है ........ सिर्फ पाइप सरकानी है .......harvester से कट जाएगा नहीं तो मजदूर. पहले महीनों चलती थी thrashing .... बैलों से कुचलते थे गेहूं फिर ओसाते थे ........दौरी कहते थे. अब तो बड़का thrasher आता है और सिर्फ 3 घंटे में 6 बीघे का गेहूं बोरे में ....... भूसा ट्रेक्टर trolly से ढो के घर में ........

story में twist .......ये ऊपर जो मेहनत लिखी है ये भी किसान महोदय को नहीं करनी है ....... 3 बीघे की खेती के लिए भी मजूरा चाहिए. सारी खेती मुसहर करते हैं. बेचारा किसान तो सिर्फ गेहूं बांटते समय बोरियां गिनने की हाड़ तोड़ मेहनत करता है.

मित्रो ......ये आज की अधिकाँश indian agriculture की स्थिति है. पूरी ईमानदारी से. अब आपको जितना बेचारा बताना है बेचारे किसान को बताइये. बेचारा victim ........

इसमें भी याद रखिये कि 100 %बड़े किसान 99 % मझोले अपने खेत में पैर तक नहीं रखते. पंजाबी हरियाणा वाले इक्का दुक्का छोड़. सिर्फ भूमिहीन किसान या फिर आधा एकड़ वाले दलित पिछड़े ही अपने हाथ से कृषि करते हैं. बाकी तो सिर्फ सधुआ मुसहर को अगोरते हैं ......

स्रोत: palpalindia.com

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