क्यों टेस्ट टीम में मिला हरभजन को मौका, और क्या जगह बनती भी है?

२० मई, २०१५ ४:३२ अपराह्न

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हरभजन सिंह के नाम ने इसलिए चौंकाया क्योंकि विराट कोहली की कप्तानी वाली टेस्ट टीम के तीन स्पिनरों में आर अश्विन और कर्ण शर्मा के साथ हरभजन सिंह को जगह मिली है, लेकिन धोनी की कप्तानी वाली वन डे टीम में जो तीन स्पिनर हैं उसमें हरभजन शामिल नहीं हैं. टीम में धोनी के तीन फेवरेट स्पिनर हैं आर अश्विन, अक्षर पटेल और रवींद्र जाडेजा.

मुंबई में हुई सिलेक्शन कमेटी की बैठक में दो साल बाद हरभजन को टेस्ट टीम में वापस लिया गया. सबसे बड़ी वजह बनी विराट कोहली की हिमायत. सिलेक्शन कमेटी में सबा करीम, संदीप पाटिल, रोजर बिन्नी, विक्रम राठौड़ और राजिन्द्र सिंह हंस मौजूद थे. टेलीकॉन्फ्रेंसिंग के जरिए महेंद्र सिंह धोनी और विराट कोहली भी जुड़े हुए थे.

इसी दौरान वनडे टीम के लिए स्पिनरों की बात हुई तो धोनी ने अपने तीनों नाम बता दिए. पर जब टेस्ट टीम में ऑफ स्पिनर आर अश्विन और लेग स्पिनर कर्ण शर्मा के अलावा तीसरे विकल्प की बात हुई तो कोहली ने ही हरभजन को अपनी पसंद बताया.

सूत्रों के मुताबिक टेलीकॉन्फ्रेंसिंग में विराट कोहली ने IPL में अच्छी गेंदबाजी की वजह से हरभजन का पक्ष लिया.

सेलेक्टरों के सामने साफ था कि टीम के लिए धोनी की कोहली की पसंद अलग-अलग हैं. इसलिए कप्तान की बात को मानते हुए टेस्ट टीम में हरभजन की जगह दी गई जबकि वनडे टीम में नहीं.

धोनी की कप्तानी में हरभजन सिंह ने 31 टेस्ट मैच खेले हैं लेकिन धोनी के दौर में 2012 से लेकर 2014 के बीच भज्जी को सिर्फ 3 टेस्ट खेलने का मौका मिला. धोनी ने पिछले कुछ साल में भज्जी के मुकाबले आर अश्विन और रविंद्र जाडेजा पर ज्यादा भरोसा किया.

इस दौरान हरभजन सिंह को 2012 में हरभजन सिंह ने मुंबई में इंग्लैंड के खिलाफ एक मात्र टेस्ट खिलाया गया जिसमें उन्होंने 2 विकेट लिए और 2013 में भज्जी को ऑस्ट्रेलिया के भारत दौरे में दो टेस्ट खिलाए गए. जिसमें उन्होंने पांच विकेट लिए.

धोनी की कप्तानी में भज्जी को 2014 में एक भी टेस्ट मैच नहीं खिलाया गया. 2014 में भज्जी को एक भी टेस्ट मैच खेला जबकि वनडे में तो भज्जी को 2011 के बाद से जगह मिली ही नहीं.

ऑस्ट्रेलिया दौरे के दौरान धोनी ने टेस्ट मैचों से संन्यास ले लिया. अब विराट कोहली टेस्ट टीम के कप्तान हैं. विराट कोहली के टेस्ट कप्तान घोषित होने के पहले दौरे में ही हरभजन की टीम में वापसी हुई है. वैसे कोहली और हरभजन की करीबी की काफी तस्वीरें सामने आती रही हैं. लेकिन सवाल ये पूछा जा रहा है कि क्या हरभजन की टीम में जगह बनती थी?

क्योंकि रणजी के पिछले सीजन में हरभजन सिंह ने तीन मैच खेले थे जिसमें हरभजन को सिर्फ 6 विकेट मिले थे. वहीं बांग्लादेश के खिलाफ भी हरभजन ने अपने करियर में कुल 3 टेस्ट खेले हैं जिसमें वो 6 विकेट ले पाए हैं. पर एक सच ये भी है कि IPL में हरभजन सिंह का प्रदर्शन अच्छा रहा है और हरभजन के पास बड़ा अनुभव तो है ही. जिसमें टेस्ट मैचों में 413 विकेट का वनडे में 259 विकेट लेने का करिश्मा हरभजन सिंह ने 17 साल लंबे करियर में किया है.

लेकिन बड़ा सवाल ये है कि हरभजन सिंह की लॉटरी कैसे लगी. कैसे दो साल बाद वो अचानक टेस्ट टीम में आ गए. आखिर चयनकर्ताओँ ने क्यों भज्जी को बांग्लादेश दौरे के लिए टीम में चुना. 2 साल बाद हरभजन सिंह की टेस्ट टीम में वापसी का एलान हुआ तो सब हैरान थे. हर कोई जानने के लिए बेताब था कि आखिर हरभजन की लॉटरी कैसे लगी. कौन है जिसने हरभजन के नाम की सिफारिश की और कैसे उनके नाम पर आखिरी राय बनी.

दरअसल टीम इंडिया के नए टेस्ट कप्तान विराट कोहली की वजह से हरभजन सिंह की टीम में वापसी हुई है. विराट कोहली ने चयनकर्ताओं को हरभजन को टीम शामिल करने की सलाह दी..बैठक में इस पर चर्चा भी हुई, जिसके बारे में मुख्य चयनकर्ता संदीप पाटिल ने भी बताया.

चयनकर्ताओं को अश्विन के अलावा बांग्लादेश दौरे के लिए एक और स्पिनर चाहिए था..एक ऐसा स्पिनर जो अनुभवी हो..जाडेजा का फॉर्म खराब था..वहीं अक्षर पटेल के पास अनुभव नहीं है. ऐसे में चयनकर्ताओं के पास हरभजन के अलावा दूसरा कोई विकल्प था ही नहीं.

बांग्लादेश की टीम में बाएं हाथ के बल्लेबाज ज्यादा हैं. ये भी एक वजह है कि हरभजन को टीम में जगह मिली..क्योंकि बाएं हाथ के बल्लेबाजों को ऑफ स्पिनर को खेलने में दिक्कत होती है. बांग्लादेश की टीम में 6 बाएं हाथ के बल्लेबाज हैं.

हरभजन की लॉटरी लगने के पीछे उनका फॉर्म भी है..भले ही उन्होंने विकेट IPL लिए हों लेकिन चयनकर्ताओं को हरभजन के प्रदर्शन ने काफी प्रभावित किया IPL के टॉप 10 गेंदबाजों में हरभजन का नाम..हरभजन ने 14 मैच में 16 विकेट लिए मुंबई को आईपीएल के फाइनल में पहुंचने के पीछे हरभजन सिंह का बहुत बड़ा रोल रहा है..पूरे टूर्नामेंट में शानदार प्रदर्शन करने वाले हरभजन की गेंदबाजी ही चेन्नई के खिलाफ क्वालिफायर में मैच का TURNING POINT रही. जिसमें उन्होंने एक ही ओवर में रैना और धोनी को चलता किया था. हरभजन ने 4 ओवर में सिर्फ 26 रन देकर दो विकेट लिए.

हरभजन के इस फॉर्म ने भी विराट कोहली और चयनकर्ताओं को अपने बारे में एक बार फिर सोचने पर मजबूर किया.

अश्विन के साथ हरभजन की जोड़ी बनाने के पीछे बांग्लादेश की पिचें भी हैं जो स्पिनर्स के लिए काफी मददगार होती हैं. पर बड़ा सवाल अभी यही बना हुआ है कि हरभजन को बांग्लादेश दौरे की अहम कड़ी बताकर एक टेस्ट के लिए टीम में चुना गया है..लेकिन उसके बाद क्या..क्या बांग्लादेश में प्रदर्शन के दम पर हरभजन लंबे समय तक टेस्ट टीम का हिस्सा बने रह सकते हैं.

स्रोत: abpnews.abplive.in

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