क्या धोनी का जादू फीका पड़ गया है?

२२ जून, २०१५ ३:५० अपराह्न

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नई दिल्ली: धोनी की कामयाबी की कहानी क्या बांग्लादेश की धरती पर खत्म हो गई. ये सवाल इसलिए क्योंकि धोनी से जुड़े आंकड़े भी यही कह रहे हैं कि उनकी कामयाबी अब कल की बात हो गई है.

2007 में टी20 विश्वकप जीतने वाले समय की तस्वीरें देश अब तक नहीं भूला और विश्वकप 2011 जीतने वाली भारतीय टीम की तस्वीरें क्रिकेट प्रेमियों के जेहन में अभी भी ताजा हैं जैसे यह कल की बात हो.

धोनी की कप्तानी में टीम ने टीम ने आसमान छुआ था. वनडे और टेस्ट रैकिंग में टीम इंडिया नंबर वन तक पहुंची थी. लेकिन जहां लगातार प्रदर्शन की बात हो वहां इतिहास के पन्नों में नहीं जिया जाता.

धोनी ने कप्तानी करते हुए पिछले आठ सालों में विदेशों में कुल 62 जीत दर्ज की और देश के सबसे सफल कप्तान बने. धोनी की कप्तानी में टीम ने ऑस्ट्रेलिया और इंग्लैंड की तेज पिचों पर भी असर छोड़ा था. लेकिन ये सब अब कल की बात नजर आती है.

पिछले दो साल में धोनी की कप्तानी मे विदेशी पिचों पर 29 वनडे खेले जिसमें से सिर्फ 12 मैच जीते और 14 हारे. तीन मैच बेनतीजा रहे. जीत का प्रतिशत रहा सिर्फ 41 फीसदी.

हाल ही में धोनी के हिस्से में विदेशी पिचों पर जो जीत आई हैं उसमें विश्वकप में अफगानिस्तान और यूएई जैसी टीमों के खिलाफ मिली जीत भी हैं. ये ऐसी टीमें हैं जिन्होंने अभी बल्ला पकड़ना ही सीखा है. ये हाल धुरंधर धोनी का नहीं हुआ करता था.

इस दो साल से पहले 6 साल यानी कप्तानी के शुरूआती 6 सालों में विदेशी धरती पर धोनी ने 88 में से 50 मैच जीते हैं 30 हारे. यानी जीत का प्रतिशत रहा 56.

अब जरा तुलना कीजिए 41 फीसदी और 56 फीसदी की. हाल के दो सालों में इग्लैंड में वनडे सीरीज जीतने के अलावा विदेशी धरती पर धोनी की कप्तानी में हार ही हाथ लगी. वहीं खुद धोनी का प्रदर्शन भी गिरा है.

कप्तान धोनी ने साल 2013 अक्टूबर से खेली 28 पारियों में एक भी शतक नहीं जमाया है. पिछले 21 महीने में कप्तान धोनी ने महज़ 1035 रन जोड़े हैं. जिनमें उनका 36 का औसत रहा. ये बल्लेबाज़ी औसत से कप्तान धोनी के करियर औसत 52 से बेहद कम है.

एक्सपर्ट को भी लगता है कि धोनी का जादू अब उतर रहा है टेस्ट में भी हमने देखा कि विराट कोहली की कप्तानी में टीम ज्यादा आक्रामक तेवरों के साथ नजर आई. ऐसी शर्मनाक हार के बाद क्रिकेट में अक्सर बड़े बदलाव होते रहे हैं और बांग्लादेश जैसी टीम से सीरीज हार के बाद इस बार भी मांग जोर पकड़ रही है.

स्रोत: abpnews.abplive.in

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