किसानों का संकट क्या है

६ मई, २०१५ ३:४२ पूर्वाह्न

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दिल्ली में, जहां दो सरकारें शासन करती हैं, राजस्थान के किसान गजेंद्र सिंह राजपूत ने पेड़ से लटक कर उस समय आत्महत्या की, जब दिल्ली के मुख्यमंत्री अरविंद केजरीवाल किसानों की रैली को संबोधित कर रहे थे। ‘आप’ के सब बड़े नेता वहां मौजूद थे। 2005 से लगभग प्रतिदिन देश में औसतन चालीस किसान आत्महत्या करते आ रहे हैं। किस सरकार ने सोचा है कि इस आत्महत्या की बढ़ती महामारी को कैसे रोका जाए?

जब किसानों ने कच्ची पर्चियां रवीश को दिखार्इं तो आढ़ती लड़ने लगा। जब पूछा गया कि सरकार की घोषणा है कि गेहूं लेते वक्त कोई कटौती नहीं की जाएगी, तो किसानों ने एक स्वर से कहा कि सरकार झूठ बोल रही है। बहुत बड़ा सवाल है कि सरकार किसानों से सीधे क्यों गल्ला नहीं खरीदती? जैसे किसान कांटे पर फैक्ट्रियों के लिए गन्ना स्वयं देने जाता है। सरकार बिचौलियों को तरजीह क्यों देती है? भारत के कृषि राज्यमंत्री ने उत्तर प्रदेश में कहा कि उप्र सरकार बिचौलियों के हित में चलती है। सोनीपत तो उत्तर प्रदेश में नहीं है। वहां भाजपा की सरकार है। मंत्रीजी भी खांटी किसान हैं। फिर इतने अनजान क्यों?

एक किसान ने बताया कि उसे एक करोड़ की जमीन पर बैंक ने ढाई लाख रुपए छह महीने के लिए दिए हैं। उसके बाद नीलामी का नोटिस लगा देंगे या फिर दुगुना सूद लेंगे। आखिर बैंक जमीन के बाजार-भाव पर कर्ज क्यों नहीं देते, इतनी कम अवधि के लिए क्यों देते हैं? किसान बैंक क्यों नहीं खोले जाते?

अगर किसान अनुबंध के अनुसार छमाही सूद की राशि बैंक को देता रहता है तो बैंक किसान को अपना अच्छा ग्राहक समझ कर अपना संबंध बनाए रख सकता है। किसान कॉरपोरेट जगत के लोगों की तरह नहीं। वे लोग बैंकों का अरबों रुपया वर्षों देने का नाम नहीं लेते। बाद में समझौते के तहत बैंकों को बहुत-सा रुपया छोड़ देना पड़ता है। उसके बावजूद उन लोगों को सरकार के दबाव में न्यूनतम सूद पर कर्ज देने के लिए सरकारी बैंक को बाध्य होना पड़ता है। किसान बिना लिखा-पढ़ी का रुपया भी हाथ जोड़ कर आढ़ती को वापस करता है, तो बैंक का रुपया वापस क्यों नहीं करेगा?

लालबहादुर शास्त्री का नारा जय जवान जय किसान बदल कर कहीं जय जवान जा.. किसान न हो जाए?

स्रोत: jansatta.com

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