चुनाव के बाद ब्रिटेन की उलझन

१६ मई, २०१५ ४:५० अपराह्न

58 0

चुनाव जीतना अब कितना अर्थहीन होता जा रहा है, यह कोई हम भारतीयों से पूछे! हमने अपनी लोकसभा के लिए वोट देते वक्त क्या-क्या प्रतिमाएं नहीं तोड़ी थीं! राजनीति के स्वघोषित पंडितों के सारे अनुमान धरे रह गए थे तो इसलिए नहीं कि उनके गणित में कुछ गड़बड़ थी। सच तो यह है कि मतदाता जब वोट देने के नए प्रतिमान गढ़ता है तभी-के-तभी उसे पढ़ सकने का शास्त्र अभी तक बना नहीं है। इसलिए पंडित पीछे रह जाते हैं, लोकतंत्र की पोथी लिखने वाला मतदाता आगे निकल जाता है। नरेंद्र मोदी जैसे बहुमत से जीते, उसके बाद किसने सोचा था कि साल भर निकलते-न-निकलते इस सरकार का कुंदन उतर जाएगा और पीतल झलकने लगेगा? लिख तो अज्ञेय बहुत पहले गए थे कि बासन अधिक घिसने से मुलम्मा छूट जाता है, लेकिन मोदी ने अपना बासन आप ही इतना घिसा कि उसका मुलम्मा छूट गया और उसमें से राहुल गांधी झलकने लगे!

अपने राजा-रानी के यहां संतान होने की खुशी में आज भी झूम-झूम उठने वाला यह मुल्क अंतरराष्ट्रीय राजनीति में अजीब-सी जगह रखता है। अपने बहुत छोटे आकार की तुलना में इंग्लैंड आज भी अपनी विशाल औपनिवेशिक छाया देख कर जीता है हालांकि अब उसके उपनिवेश कहीं बचे नहीं हैं। बची हैं बस छायाएं ही जिनका कद कभी सच्चा नहीं होता है। इंग्लैंड संयुक्त राष्ट्र सुरक्षा परिषद का स्थायी सदस्य है और विश्व के परमाणुसंपन्न राष्ट्रों में उसकी गिनती होती है। लेकिन बम से दम का कोई नाता नहीं है, यह बताते हुए अंतरराष्ट्रीय जगत में इंग्लैंड की कुल महत्ता मात्र इतनी बची है कि वह अमेरिकी खेमे का सबसे भरोसेमंद सदस्य है- अमेरिका का सबसे पालतू देश!

इंग्लैंड की आर्थिक कुंडली लिखने में भारत की एक अनोखी स्थिति है। इंग्लैंड में पूंजी निवेश करने वाले सबसे बड़े देशों की सूची में भारत तीसरे नंबर पर आता है। इंग्लैंड में भारतीयों की सात सौ से अधिक कंपनियां काम करती हैं। ये कंपनियां इंग्लैंड में रोजगार देने वाली दूसरी सबसे बड़ी एजेंसी हैं। अकेले लंदन में, पिछले पांच सालों में भारतीयों ने 1.3 अरबपौंड का निवेश किया है और साढ़े तीन हजार नए रोजगार खड़े किए हैं। अब सवाल है तो यह कि प्रवासियों के बारे में कैमरन क्या रुख लेंगे? आव्रजन (इमीग्रेशन) कानून को सख्त करने की बात करने वाले कैमरन क्या ऐसी स्थिति में हैं कि भारतीयों को धंधा बंद कर, चले जाने को कहें?

अपनी चुनावी सभाओं में वे कहते रहे कि आव्रजन कानून चाहे जैसा बने, उसमें प्रतिभावान भारतीयों के आने और इंग्लैंड में बसने का विशेष प्रावधान होगा। अगर ऐसा हुआ तो एशिया के बाकी मुल्क, जिनकी भी इंग्लैंड में खासी उपस्थिति है और इंग्लैंड के विकास में जिनका योगदान किसी से कम नहीं है, क्या वे सब कैमरन को चैन से रहने देंगे?

स्रोत: jansatta.com

श्रेणी पृष्ठ पर

Loading...