जाकिर नाईक के प्रत्‍यर्पण से इंकार पर मलेशिया सरकार में फूट

१३ जुलाई, २०१८ ११:४४ पूर्वाह्न

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विवादित इस्लामिक प्रचारक जाकिर नाईक के प्रत्‍यर्पण से इंकार पर मलेशिया के मानव संसाधन मंत्री ने अपनी सरकार की आलोचना की है.

न्‍यूज़ एजेंसी के मुताबिक मलेशिया के मानव संसाधन मंत्री एम कुला सारन ने कैबिनेट मीटिंग में जाकिर नाईक के प्रत्‍यर्पण को लेकर सरकार को नसीहत दी है.

उन्‍होंने कहा है कि सरकार को नियमों का पालन करते हुए जाकिर नाईक को प्रत्‍यर्पित कर भारत भेज देना चाहिए. उन्‍होंने मलेशिया के प्रधानमंत्री महातिर मोहम्मद पर निशाना साधते हुए कहा कि किसी एक व्‍यक्ति को इस संबंध में फैसला लेने का अधिकार नहीं है. यह सरकार के लिए ठीक नहीं है.

दरअसल, बीते दिनों जाकिर नाईक ने मलेशियाई प्रधानमंत्री महातिर मोहम्मद से मुलाकात की थी. मुलाकात से एक दिन पहले ही शुक्रवार को मलेशिया के प्रधानमंत्री ने जाकिर नाईक को प्रत्यर्पित कर भारत भेजने से इंकार कर दिया था. मोहम्मद ने कहा था कि जब तक वह हमारे देश में कोई दिक्कत खड़ी नहीं कर रहे हैं तब तक उनका प्रत्यर्पण नहीं किया जाएगा.

जाकिर को मलेशिया की नागरिकता भी प्राप्त है. भारत ने जनवरी में मलेशिया सरकार से नाईक को स्वदेश भेजने का औपचारिक अनुरोध किया था. वह भारत में नफरत फैलाने वाले अपने भाषणों से युवाओं को आतंकवादी गतिविधयों के लिए उकसाने और मनी लॉन्ड्रिंग जैसे मामलों का आरोपी है. दोनों देशों में प्रत्यर्पण संधि के बावजूद मलेशिया नाईक को भारत भेजने के लिए तैयार नहीं है.

जाकिर ने कहा था कि अभी मेरा भारत आने का कोई प्लान नहीं है, जब तक निष्पक्ष सुनवाई नहीं होगी तब तक वह नहीं आएंगे. इसके अलावा नाईक ने कहा कि जब मुझे लगेगा कि भारत में निष्पक्ष सरकार है वह तभी भारत वापस आएगा.

गौरतलब है कि NIA ने 18 नवंबर 2016 को अपनी मुंबई ब्रांच में नाईक के खिलाफ यूएपीए कानून और आईपीसी की विभिन्न धाराओं के तहत मामला दर्ज किया था.

नाईक के खिलाफ गैरकानूनी गतिविधियां रोकथाम अधिनियम (UAPA) और भारतीय दंड विधान की धारा 20 (b), 153 (a), 295 (a), 298 और 505 (2) के तहत आरोप तय किए गए थे. बांग्लादेश में आतंकी हमले को अंजाम देने वाले आतंकियों ने जब जाकिर से प्रभावित होने की बात कबूली, तो वो एक जुलाई, 2016 को भारत से भाग गया. इसके बाद जाकिर के एनजीओ को केंद्रीय गृह मंत्रालय ने बैन कर दिया था.

NIA ने जाकिर पर देश में सांप्रदायिक सौहार्द बिगाड़ने का आरोप लगाया था. आतंकी संगठन ISIS में शामिल होने के लिए देश छोड़ने वाले भारतीय युवकों ने भी भारतीय एजेंसियों को बताया था कि वे जाकिर के भाषण से प्रभावित थे. जाकिर नाईक के पीस टीवी को कई देशों में बैन किया गया है.

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स्रोत: legendnews.in

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