दीपिका की 'माइ चॉइस' के क्या हैं मायने?

६ अप्रैल, २०१५ ६:३७ पूर्वाह्न

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'माइ चॉइस' में दीपिका को यह कहते हुए दिखाया गया है- "मैं शादी करूं या न करूं, मेरी मर्जी, शादी से पहले सेक्स करूं या शादी के बाद भी किसी से रिश्ते रखूं मेरा मन, किसी पुरुष से प्यार करूं या महिला से या फिर दोनों से, मेरी मर्जी। मुझसे जुड़े सारे फैसले मेरे हैं, ये मेरा हक है।"

क्या इस वीडियो से महिलाओं में भी वर्ग भेद किए जाने की बू नहीं आती? क्या वीडियो देखने के बाद महिलाओं के सामान्य और अभिजात वर्ग का भान नहीं होता? 'माइ चॉइस' में दीपिका पादुकोण ने जो कहा है, वह महिला स्वतंत्रता और सोच बदलने की बात है या फिर केवल यौन उन्मुक्तता का संदेश? जिस तरह से यौन उन्मुक्तता की बात की गई है, क्या वह हमारे समाज में कभी स्वीकार किया जाएगा? वीडियो में महज शारीरिक स्वतंत्रता या यौन उन्मुक्तता की ही बात है, क्या इससे पुरुषों का स्त्रियों के प्रति चला आ रहा नजरिया बदल जाएगा?

मर्जी की हद को लेकर ये जो वीडियो है, इस पर समाज दो धड़ों में बंटता दिख रहा है। लेकिन विचारणीय प्रश्न यह है कि क्या दीपिका पादुकोण महिलाओं के सामाजिक बंधनों को तोड़ने और स्त्री स्वातं˜य के नाम पर मनमर्जी के लिए उकसा नहीं रही हैं? या फिर सशक्तीकरण के नाम पर उन्हें जागरूक कर रही हैं?

भारत में सामाजिक सरोकारों की जड़े 21 वीं सदी के इस दौर में भी काफी गहरी हैं, आस्था, विश्वास और सामाजिक मयार्दाएं शेष हैं। ऐसे में वीडियो से सामाजिक विघटन का संदेश जाने से इतर और क्या है। दूसरे शब्दों में यह वीडियो खासकर युवतियों को खुले सेक्स के लिए भी तो एक तरह से उकसा ही रहा है!

'माइ चॉइस' सामाजिक बंधनों की बलि भी चढ़ा रहा है और खुले आम विद्रोह जैसी बात कह रहा है। ये कैसी सोच है। इसके पैरोकार भी बड़ी तादाद में खुलकर सामने आ रहे हैं। लोग अपने-अपने तर्क दे रहे हैं। सवाल यह है कि हासिल क्या हो रहा है?

स्रोत: newswing.com

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