न्यायमूर्ति रंजन गोगोई न्यायपालिका में सुधार नहीं, एक क्रांति चाहते हैं

१३ जुलाई, २०१८ ६:३७ पूर्वाह्न

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उच्चतम न्यायालय के वरिष्ठ न्यायाधीश न्यायमूर्ति रंजन गोगोई ने गुरुवार को कहा कि न्यायपालिका को आम आदमी की सेवा के योग्य बनाए रखने के लिए ‘सुधार नहीं एक क्रांति’ की जरूरत है.

न्यायमूर्ति गोगोई ने साथ ही इस बात पर भी ज़ोर दिया कि न्यायपालिका को और अधिक सक्रिय रहना होगा.

जस्टिस गोगोई ने इंडियन एक्सप्रेस के एक कार्यक्रम में कही. इस मौके पर सुप्रीम कोर्ट और हाई कोर्ट के कई जज मौजूद थे.

न्यायाधीश रंजन गोगई ने कहा कि समाज में बदलाव के लिए न्यायपालिका को ‘सुधार नहीं, क्रांति की ज़रूरत’ है.

जस्टिस गोगोई ने साथ ही इस बात पर भी जोर दिया कि न्यायपालिका को और ‘अधिक सक्रिय’ रहना होगा.

जस्टिस गोगोई ने दिल्ली के तीन मूर्ति भवन में ‘न्याय की दृष्टि’ विषय पर व्याख्यान में कहा कि न्यायपालिका ‘उम्मीद की आखिरी किरण’ है और वह ‘महान संवैधानिक दृष्टि का गर्व करने वाला संरक्षक’ है. इस पर समाज का काफी विश्वास है.

18 नवंबर, 1954 में पैदा होने वाले जस्टिस रंजन गोगोई 1978 में वकील बने. गुवाहाटी हाईकोर्ट में लंबे समय तक वकालत करने के बाद 28 फरवरी 2001 को वह गुवाहाटी हाईकोर्ट में स्थाई जज के रूप में नियुक्त हुए.

इसके बाद 9 सितंबर 2010 को उनका तबादला पंजाब-हरियाणा हाईकोर्ट में हुआ और 23 अप्रैल 2012 को वह सुप्रीम कोर्ट के जज बने.

जस्टिस रंजन गोगोई उस बैंच में शामिल रहे हैं जिन्होंने सुप्रीम कोर्ट के पूर्व न्यायाधीश मार्कंडेय काटजू को सौम्या मर्डर केस पर ब्लॉग लिखने के संबंध में निजी तौर पर अदालत में पेश होने के लिए कहा था.

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स्रोत: legendnews.in

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