प्रदीप द्विवेदी: तोगडिय़ा से केन्द्र सरकार को तत्काल राहत, पर आगे क्या?

१५ अप्रैल, २०१८ ११:४९ पूर्वाह्न

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प्रदीप द्विवेदी: तोगडिय़ा से केन्द्र सरकार को तत्काल राहत, पर आगे क्या?

नई दिल्ली. विहिप... विश्व हिंदू परिषद से कहने को प्रवीणभाई तोगडिय़ा युग समाप्त हो गया है और इससे तोगडिय़ा के राजनीतिक विरोधियों को तत्काल राहत भी मिलगी, लेकिन... आगे क्या? इसको लेकर अनेक सवाल हैं और इनके जवाबों का सार निकाले तो लगता है कि अप्रत्यक्ष रस्साकशी खत्म हो गई है परन्तु भविष्य में प्रत्यक्ष रस्साकशी के लिए तोगडिय़ा स्वतंत्र हो गए हैं!

चुनावी वर्ष में विहिप के बड़े नेता प्रवीणभाई तोगडिय़ा का विहिप से अलग होना और बगावत का एलान करना भाजपा के लिए यकीनन् परेशानी बढ़ाने वाला है, दरअसल... केन्द्र की सत्ता में आने के बाद लंबी सियासी पारी खेलने की गरज से पीएम नरेन्द्र मोदी और भाजपा ने अपनी आक्रमक राजनीति छोड़कर सुरक्षात्मक सियासी रास्ता पकड़ा है क्योंकि वे जानते हैं कि आक्रमक कट्टर नीति से तो हाथ आई केन्द्र की सत्ता फिर से निकल जाएगी, लेकिन यह साफ्ट हिन्दूत्व पुराने आक्रमक साथियों को रास नहीं आ रहा है, लेकिन... आगे क्या?

भाजपा का सोचना है कि विरोधियों के पास भाजपा के अलावा कोई विकल्प नहीं है? तो, तोगडिय़ा जैसे विरोधियों के सामने भी यक्षप्रश्र है कि वे अपनी विभाजित ताकत का इस्तेमाल किसके लिए करें? क्योंकि भाजपा को छोड़ दें तो उनके विचारों के लिहाज से केवल शिवसेना जैसे दल ही उनके साथ रह सकते हैं?

क्योंकि शिवसेना भाजपा को सबक सिखाना चाहती है, इसलिए गुजरात में अपने पैर जमाने की लगातार कोशिश कर रही है, यदि तोगडिय़ा का साथ मिलता है तो शिवसेना को गुजरात में संजीवनी मिल सकती है? यही नहीं, यदि तोगडिय़ा किसी राजनीतिक दल के साथ खड़े होते हैं तो उस दल को कोई फायदा हो कि नहीं, भाजपा को थोड़ा-बहुत नुकसान जरूर होगा?

उल्लेखनीय है कि... तोगडिय़ा की नाराजगी के बावजूद हिमाचल प्रदेश के पूर्व राज्यपाल विष्णु सदाशिव कोकजे को विहिप का नया अंतरराष्ट्रीय अध्यक्ष चुना गया. विहिप से जुड़े दो बड़े संगठनों के वरिष्ठ नेताओं की नाराजगी के चलते तोगडिय़ा को अंदाज हो गया था कि चुनाव में उनके उम्मीदवार की जीत मुश्किल है, इसीलिए... चुनाव पूर्व ही उनके विरोधी स्वर तेज हो गए थे?

दरअसल, केन्द्र में पीएम नरेन्द्र मोदी की सरकार बनने के बाद से ही तोगडिय़ा अपनो का ही प्रत्यक्ष/परोक्ष विरोध करते रहे थे और राम मंदिर जैसे मुद्दों को लेकर काफी आक्रामक थे!

हालांकि, उन्हें पीएम नरेन्द्रभाई मोदी के विरोधियों का प्रत्यक्ष/परोक्ष सहयोग मिलेगा, लेकिन... अपनेआप को मुख्यधारा में बनाए रखना प्रवीणभाई तोगडिय़ा के सामने सबसे बड़ा प्रश्र है?

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स्रोत: palpalindia.com

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