प्रदीप द्विवेदी: पीएम ही क्यों? फिर से राष्ट्रपति भी बन सकते हैं प्रणब मुखर्जी!

११ जून, २०१८ १२:४८ अपराह्न

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प्रदीप द्विवेदी: पीएम ही क्यों? फिर से राष्ट्रपति भी बन सकते हैं प्रणब मुखर्जी!

सियासत के सितारे. यदि आप हाथ की रेखाओं पर भरोसा करें तो... पूर्व राष्ट्रपति प्रणब मुखर्जी की हाथ की रेखाएं बताती हैं कि अभी उनके जीवन में उपलब्धियों का एक सुनहरा अध्याय बाकी है? राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ के कार्यक्रम में पूर्व राष्ट्रपति प्रणब मुखर्जी के शामिल होने के बाद से ही विविध बयानों का दौर जारी है. इसी कड़ी में शिवसेना सांसद संजय राउत ने 2019 में प्रणब मुखर्जी के प्रधानमंत्री बनने की बात भी कही? उन्होंने यह कह कर तहलका मचा दिया कि भाजपा को बहुमत नहीं मिलने की स्थिति में प्रणब मुखर्जी पीएम पद के सर्वमान्य उम्मीदवार हो सकते हैं?

वैसे राजनीति में कुछ भी असंभव नहीं है और सियासी इतिहास पर नजर डालें तो ऐसे अनेक मौके आए जब चर्चित नामों से हट कर कोई और ही प्रधानमंत्री बन गया? पूर्व प्रधानमंत्री मनमोहन सिंह के समय भी खुद प्रणब मुखर्जी ही सबसे आगे थे, लेकिन सोनिया गांधी की वे पहली पसंद नहीं बन पाए और सिंह प्रधानमंत्री बन गए!

बाद में वे राष्ट्रपति बने, लेकिन बहुत संभव है कि 2019 के आम चुनाव के बाद त्रिशंकु हालात में पीएम का पद उन्हें मिलने की संभावना बन जाए?

और पीएम ही क्यों, अगली बार राष्ट्रपति के लिए भी सर्वसम्मत प्रत्याशी की जरूरत पड़ सकती है? ऐसी स्थिति में प्रणब मुखर्जी फिर से राष्ट्रपति भी बन सकते हैं!

वैसे तो संघ के समर्थन के बगैर भाजपा का कोई खास अस्तित्व नहीं है और संघ, भाजपा के हर प्रत्यक्ष/परोक्ष कदम का समर्थन करता रहा है, लेकिन भाजपा के कांग्रेस मुक्त भारत के सपने को संघ ने अस्वीकार कर दिया, क्यों? भाजपा सियासी कारणों से कांग्रेस मुक्त भारत चाहती है, जबकि संघ का लक्ष्य सियासी नहीं है, वैचारिक है, संगठनात्मक है और इसीलिए संघ संभवतया कांग्रेस मुक्त भारत नहीं, वंशवाद मुक्त कांग्रेस चाहता है!

संघ के कार्यक्रम में पूर्व राष्ट्रपति प्रणब मुखर्जी के शामिल होने के बाद से ही विविध बयानों का दौर जारी है. इसी कड़ी में शिवसेना सांसद संजय राउत ने 2019 में प्रणब मुखर्जी के प्रधानमंत्री बनने की बात कही थी? लेकिन... पूर्व राष्ट्रपति की बेटी शर्मिष्ठा मुखर्जी ने इन अटकलों को सिरे से खारिज कर दिया और ट्वीट कर कहा कि... श्रीमान राउत, राष्ट्रपति पद से रिटायर होने के बाद मेरे पिता फिर दोबारा सक्रिय राजनीति में कदम नहीं रखने जा रहे हैं!

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याद रहे, एक न्यूज एजेंसी से बात करते हुए संजय राउत ने कहा था कि... हमें लगता है कि बीजेपी को बहुमत नहीं मिलने की स्थिति में आरएसएस प्रधानमंत्री पद के लिए पूर्व राष्ट्रपति प्रणब मुखर्जी का नाम आगे करने की तैयारी कर रहा है? किसी भी स्थिति में बीजेपी इस बार कम-से-कम 110 सीटों पर हारेगी!

उल्लेखनीय है कि... शर्मिष्ठा मुखर्जी ने ही पूर्व राष्ट्रपति प्रणब मुखर्जी के संघ के कार्यक्रम में शामिल होने का विरोध किया था. उन्होंने ट्विटर के जरिए अपनी बात भी रखी थी कि... आरएसएस भी यह कल्पना नहीं कर सकता है कि आप अपने भाषणों में उनके विचारों को बढ़ावा देंगे, लेकिन भाषणों को भुला दिया जाएगा और तस्वीरें याद रह जाएंगी!

हालांकि सियासी इतिहास पर नजर डालें तो कांग्रेस में रहते हुए भी प्रणब मुखर्जी ने अपना स्वतंत्र अस्तित्व बरकरार रखा और संभवतया यही वजह रही होगी कि सोनिया गांधी ने उनके बजाय मनमोहन सिंह को पीएम के रूप में पसंद किया, जो कि उनसे सियासी अनुभव में जूनियर थे!

लगभग यह तस्वीर अब साफ होती जा रही है कि 2019 में भाजपा, कांग्रेस और क्षेत्रीय दलों का विचित्र त्रिकोण बनेगा? और भाजपा या कांग्रेस एक तरफा निर्णय नहीं कर पाएंगी? ऐसी स्थिति में क्षेत्रीय दलों को राजी किए बगैर किसी का पीएम बनना आसान नहीं रहेगा? जाहिर है, तृणमूल कांग्रेस, तेलुगू देशम, तेलंगाना राष्ट्र समिति जैसे दल प्रणब मुखर्जी को सर्वमान्य उम्मीदवार के रूप में स्वीकार कर सकते हैं!

वे इसलिए भी स्वीकार्य हो सकते हैं कि उनके पास बेहतर सियासी अनुभव है, भाजपा सहित ज्यादातर सियासी दलों के साथ भी उनका अच्छा तालमेल रहा है? संघ के कार्यक्रम में जा कर उन्होंने सियासी संभावनाओं का एक नया दरवाजा खोल दिया है! मतलब... विवादास्पद विषम राजनीतिक परिस्थितियों में वे 2019 के आम चुनाव के बाद पीएम भी बन सकते हैं और पुन: राष्ट्रपति भी बन सकते हैं?

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स्रोत: palpalindia.com

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