बलात्कार मामले में पुलिस के खिलाफ सुप्रीम कोर्ट पहुंची छात्रा

२० मई, २०१५ १२:४१ अपराह्न

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हरयाणा की एक स्टूडेंट ने सुप्रीम कोर्ट में याचिका दायर की है कि पुलिस उसके बलात्कार के आरोपियों को बचाने की कोशिश में लगी है.

21 साल की यह युवती हिसार की जिंदल ग्लोबल यूनिवर्सिटी की छात्रा है. वह यूनिवर्सिटी के मैनेजमेंट प्रोग्राम के दूसरे साल में पढ़ रही है और उसका आरोप है कि यूनिवर्सिटी के तीन लड़कों ने उसके साथ बलात्कार किया. युवती ने अदालत से दरख्वास्त की है कि मामले की जांच पुलिस से लेकर सीबीआई को सौंप दी जाए. वरिष्ठ एडवोकेट इंदिरा जयसिंह और देवदत कामत ने युवती की ओर से बुधवार को यह याचिका अदालत के सामने पेश की.

युवती का आरोप है कि तीन सीनियर लड़कों ने कैम्पस में ही कई बार जबरन उसके साथ शारीरिक संबंध बनाए, उसकी नग्न तस्वीरें लें और उसे ब्लैकमेल किया. युवती को धमकाया गया कि यदि वह किसी को इस बारे में बताएगी तो उसकी तस्वीरों को इंटरनेट पर डाल दिया जाएगा. इसके बाद वॉट्सऐप के जरिए यूनिवर्सिटी के अन्य छात्रों के साथ ये तस्वीरें शेयर की गयीं.

याचिका दायर करते हुए इंदिरा जयसिंह ने कहा कि पुलिस लैपटॉप और मोबाइल फोन से सभी इलेक्ट्रॉनिक प्रमाण नष्ट करने में लगी है. उन्होंने बताया कि जिस एसएचओ ने युवती की एफआईआर दर्ज की थी, उसका राजनीतिक दबाव के चलते अगले ही दिन तबादला कर दिया गया था. जयसिंह ने कहा, "याचिकाकर्ता को धमकाया गया, उसके साथ बलात्कार जैसा भयानक अपराध किया गया और अप्राकृतिक रूप से उसके साथ जबरन संबंध बनाए गए. अभियुक्त ने अपने मोबाइल फोन से ली गयी तस्वीरें वॉट्सऐप के जरिए यूनिवर्सिटी की स्टूडेंट्स को भेजीं."

प्रशासन पर समर्थन ना करने का आरोप लगाते हुए उन्होंने कहा, "राज्य सरकार के अधिकारियों का रवैया बेहद लापरवाही भरा, चिंताजनक और गैरपेशेवर रहा है. याचिकाकर्ता को मामला सीबीआई को सौंपने के निवेदन के साथ इस अदालत के पास आना पड़ा है क्योंकि पुलिस द्वारा की जा रही जांच तुच्छ, लापरवाह, पक्षपातपूर्ण और नाजायज तरीके से हो रही है, जिस कारण याचिकाकर्ता के सम्मान से, बिना किसी तरह के शोषण के जीने के हक को क्षति पहुंच रही है." जस्टिस एके सीकरी और यूयू ललित की बेंच 25 मई को इस मामले की सुनवाई करेगी.

स्रोत: dw.de

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