बांबे हाईकोर्ट में जनहित याचिका, 10 परमाणु वैज्ञानिकों की मौत का राज क्या है?

२२ मई, २०१५ ८:४५ पूर्वाह्न

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नई दिल्ली. न्यूक्लियर फिजिक्स ऐसा सबजेक्ट है जो देश के बेहद मेघावी स्टूडेंट्स ही चुनते हैं, लेकिन ऐसे विषय को चुन कर देश की सेवा में लगे प्रतिभावान लोगों की जब रहस्यमयी तरीके से मौत होने लगे तो सवाल उठना लाजमी है. परमाणु ऊर्जा विभाग (डीएई) से मिली जानकारी बताती है कि 2009 से 2013 के दौरान देश के 10 परमाणु कर्मियों की रहस्यमयी तरीके से मौत या हत्या हुई है.

भाभा परमाणु अनुसंधान केंद्र (बार्क) के वैज्ञानिकों की आवासीय कॉलोनी दक्षिण मुंबई के चर्चित भूलाभाई देसाई रोड के पास ही है. साल 2010 में उच्च सुरक्षा वाली यह कॉलोनी अचानक चर्चा में आ गई जब इसके एक फ्लैट में बार्क के वैज्ञानिक एम पद्मनाभन (48 वर्ष) का शव पाया गया. उनकी लाश के पास नायलोन की रस्सी और कुछ कंडोम मिले थे. पुलिस ने प्रारंभिक जांच में इसे अप्राकृतिक सेक्स से जुड़ी हत्या का मामला बताया. लेकिन जब जांच आगे बढ़ी तो वह अपनी बात साबित नहीं कर पाई. 2012 में पुलिस ने अदालत में क्लोजर रिपोर्ट दाखिल कर दी. इसमें पद्मनाभन की हत्या की बात तो उसने मानी लेकिन कहा कि इस मामले की जांच आगे बढ़ाने के लिए उसके पास पर्याप्त सबूत नहीं है. इस रिपोर्ट के बाद मामला खत्म हो गया.

ऐसा ही 14 जून, 2009 में कर्नाटक स्थित कैगा परमाणु रिएक्टर से जुड़े एक सीनियर इंजिनियर लोकनाथन महालिंगम की लाश काली नदी में पाई गई थी. वे हफ्तेभर पहले रहस्यमय तरीके गायब हो गए थे. पुलिस के मुताबिक यह मामला आत्महत्या का था लेकिन महालिंगम के परिवार के सदस्य इससे सहमत नहीं हैं. उनका मानना है कि महालिंगम का अपहरण कर उनकी हत्या की गई है. पुलिस इस केस को भी बंद कर चुकी है.

साल 2013 में विशाखापत्तनम के पास रेलवे लाइन पर केके जोश और अभीश शिवम के शव पाए गए थे. ये दोनों इंजिनियर देश की पहली स्वदेसी परमाणु पनडुब्बी अरिहंत के निर्माण से जुड़े रहे हैं. भारत के परमाणु प्रतिष्ठानों से जुड़े वैज्ञानिकों और वरिष्ठ अधिकारियों की रहस्यमयी मौत से जुड़े ऐसे सिर्फ दो मामले नहीं हैं. डीएई के अनुसार 2009 से 2013 के दौरान दस परमाणु कर्मियों की रहस्यमय हत्या या मौत हुई है. ये मामले हाल ही में एकबार फिर चर्चा में आए जब बांबे हाईकोर्ट में एक जनहित याचिका दाखिल कर इन सभी की जांच, विशेष जांच दल (एसआईटी) से करवाने की मांग की गई. एक आरटीआई एक्टिविस्ट चेतन कोठारी ने यह याचिका लगाई है.

कोठारी ने 2010 में डीएई में आरटीआई लगाकर यह जानकारी मांगी थी कि बीते 15 सालों में विभाग के कितने कर्मियों की असामान्य मौत हुई है. इसके जवाब में डीएई का कहना था कि 1995 से 2010 तक उसके सभी 32 केंद्रों में 197 कर्मियों के आत्महत्या करने के मामले सामने आए थे. बार्क में 2010 के दौरान ही तीन वैज्ञानिकों ने आत्महत्या की थी. कोठारी ने अपनी याचिका में इन हत्याओं के पीछे साजिश की आशंका जताई है. कोठारी की याचिका पर अभी सुनवाई होना बाकी है.

स्रोत: palpalindia.com

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