बाहर निकलने में डर लगता है.

४ अगस्त, २०१५ ३:१८ अपराह्न

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बाहर निकलने में डर लगता है.

दिल्ली के आनंद परबत इलाक़े में पिछले महीने एक लड़की की दिन दहाड़े निर्मम हत्या के बाद वहां रहने वाली कई लड़कियां अकेले बाहर जाने से डरती हैं.

मीडिया वालों को देखकर यहाँ के लोग ख़ुद आपको मीनाक्षी के घर का पता बता देते हैं.

19 वर्षीय मीनाक्षी की 16 जुलाई को इसी इलाके के दो लड़कों ने चाकू मारकर हत्या कर दी थी.

इस घटना के बाद से इलाक़े में पुलिस ने गश्त बढ़ा दी है, लेकिन यहां रहने वाले कई लोग अब भी सहमे हैं.

कॉलेज जाने वाली 19 साल की बरखा जींस और शर्ट में आधुनिक और आत्मविश्वास से भरी लगती हैं.

लेकिन तभी तक, जब तक मैंने ये सवाल नहीं पूछा कि मीनाक्षी की हत्या के बाद क्या लड़कियों के लिए डर बढ़ा है?

मेरे इस सवाल पर बरखा कहती हैं, "यहां पर आज भी लड़के गुट बना कर खड़े होते हैं जहाँ से निकलने में डर लगता है. हमारी सुरक्षा एक बड़ी समस्या है."

वो कहती हैं, "आनंद परबत में अकेले निकलने से डर लगता है. लोग डर के मारे पुलिस से शिकायत ही नहीं करते है."

उनका कहना है, "आजकल मीनाक्षी मर्डर के बाद पुलिस रात में गश्त तो लगाती हैं लेकिन 'निर्भया' जैसा कांड दिल्ली में हुआ तो हम कैसे भरोसा कर लें कि मीनाक्षी मर्डर में कोई इंसाफ होगा. अगर होगा तो सिर्फ़ और सिर्फ़ राजनीति."

47 वर्षीय अशोक कहते हैं, "लफ़ंगों से प्यार से बातें करनी पड़ती हैं ताकि हमारे साथ कोई हादसा न हो. बेटी को बाहर सामान लाने के लिए या स्कूल भेजने में भी घबराहट होती है."

वो कहते हैं, "असामाजिक तत्व हमेशा से ही परेशान करते रहे हैं. यहाँ पुलिस की कोई गश्त नहीं होती थी. लेकिन मीनाक्षी की हत्या के दस दिन बाद पुलिस अब दिखाई देती है."

16 वर्षीय कोमल का कहना है कि वो गली में मौजूद लड़कों की वजह से अपनी पसंद के कपड़े नहीं पहन पातीं हैं और उन्हें अकेले निकलने में घबराहट होती है.

मीनाक्षी का संबंध एक ग़रीब परिवार से था. उनके पिता मजदूर हैं और कैंसर के मरीज़ भी हैं. ऐसे में, मीनाक्षी ही घर का ख़र्चा चलाती थीं.

मीनाक्षी की मां बताती हैं, "वो पढ़ने की शौक़ीन थी लेकिन घर चलाने के लिए 11वीं के बाद वे पढ़ नहीं पाईं."

स्रोत: bbc.com

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