भगवान श्रीकृष्ण की क्रीड़ा स्थली वृन्दावन

२४ जुलाई, २०१५ ३:३१ अपराह्न

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भगवान श्रीकृष्ण की क्रीड़ा स्थली वृन्दावन

वृंदावन उत्तर प्रदेश के मथुरा जिला के अंतर्गत आता है. यह भगवान श्रीकृष्ण की क्रीड़ा स्थली था. वह अपने सखाओं के साथ गाय चराने और खेलने के लिए यहां आया करते थे. यहां पर मंदिरो की संख्या काफी अधिक है. पूरे वृंदावन में लगभग पांच हजार मंदिर है. क्षेत्रफल के अनुपात में यह संख्‍या काफी अधिक है. यह स्थान भगवान श्रीकृष्ण को काफी प्रिय था. ज्यादा लीलाये भगवान कृष्ण ने यही पर ही रचाई थीं. मथुरा और वृंदावन आपस में अंर्तसंबंधित है.

कहा जाता है भगवान कृष्ण वृंदावन छोड़कर नही गये है वह आज भी वृंदावन में है. कृष्ण भक्तो के लिए यह महत्वपूर्ण स्थान है. प्रत्येक व्यक्ति की यह इच्छा होती है कि वह देह त्याग से पूर्व एक बार वृंदावन जरूर आये. भगवान श्रीकृष्ण ने अपना अधिकांश समय यहीं पर व्‍यतीत किया था. इसी कारण वृंदावन को अन्य धार्मिक स्थलो से अलग माना जाता है. चैतन्य महाप्रभु का कहना था कि वृंदावन वह धाम है, जहां पर कण-कण में भगवान कृष्ण बसते है. यहां के पेड़ो, पत्तो आदि के अन्दर भी भगवान श्रीकृष्ण का वास है. इसे प्रधान धाम भी कहा जाता है. प्रत्येक व्यक्ति यहां पर आकर ही जीवन के सत्य को जान पाता है. वृंदावन में आकर सभी को आध्यात्मिक आंनद की प्राप्ति होती है.

वृंदावन में बांके बिहारी जी का एक भव्य मंदिर है. इस मंदिर में बिहारी जी की काले रंग की एक प्रतिमा है. इस प्रतिमा के विषय में मान्यता है कि इस प्रतिमा में साक्षात् श्री कृष्ण और राधा समाए हुए हैं. इसलिए इनके दर्शन मात्र से राधा कृष्ण के दर्शन का फल मिल जाता है.

इस प्रतिमा के प्रकट होने की कथा और लीला बड़ी ही रोचक और अद्भुत है इसलिए हर साल मार्गशीर्ष मास की पंचमी तिथि को बांके बिहारी मंदिर में बांके बिहारी प्रकटोत्सव मनाया जाता है.

धार्मिक नगरी वृन्दावन में निधिवन एक अत्यन्त पवित्र, रहस्यमयी धार्मिक स्थान है. मान्यता है कि निधिवन में भगवान श्रीकृष्ण एवं श्रीराधा आज भी अर्द्धरात्रि के बाद रास रचाते हैं. रास के बाद निधिवन परिसर में स्थापित रंग महल में शयन करते हैं. रंग महल में आज भी प्रसाद (माखन मिश्री) प्रतिदिन रखा जाता है.

शयन के लिए पलंग लगाया जाता है. सुबह बिस्तरों के देखने से प्रतीत होता है कि यहां निश्चित ही कोई रात्रि विश्राम करने आया तथा प्रसाद भी ग्रहण किया है. लगभग दो ढ़ाई एकड़ क्षेत्रफल में फैले निधिवन के वृक्षों की खासियत यह है कि इनमें से किसी भी वृक्ष के तने सीधे नहीं मिलेंगे तथा इन वृक्षों की डालियां नीचे की ओर झुकी तथा आपस में गुंथी हुई प्रतीत हाते हैं.

निधिवन परिसर में ही संगीत सम्राट एवं धुपद के जनक श्री स्वामी हरिदास जी की जीवित समाधि, रंग महल, बांके बिहारी जी का प्राकट्य स्थल, राधारानी बंशी चोर आदि दर्शनीय स्थान है. निधिवन दर्शन के दौरान वृन्दावन के पंडे-पुजारी, गाईड द्वारा निधिवन के बारे में जो जानकारी दी जाती है, उसके अनुसार निधिवन में प्रतिदिन रात्रि में होने वाली श्रीकृष्ण की रासलीला को देखने वाला अंधा, गूंगा, बहरा, पागल और उन्मादी हो जाता है ताकि वह इस रासलीला के बारे में किसी को बता ना सके.

स्रोत: palpalindia.com

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