याक़ूब के सारे क़ानूनी विकल्प ख़त्म: केटीएस तुलसी

२९ जुलाई, २०१५ १२:३८ अपराह्न

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याक़ूब के सारे क़ानूनी विकल्प ख़त्म: केटीएस तुलसी

सुप्रीम कोर्ट ने याक़ूब मेमन की सभी अपील को ख़ारिज कर दी है. पहले के तयशुदा कार्यक्रम के अनुसार याक़ूब को 30 जुलाई यानी गुरूवार को फांसी दी जानी है.

लेकिन इस बीच याक़ूब मेमन ने राष्ट्रपति के पास एक बार फिर दया याचिका भेजी है जिसे राष्ट्रपति ने परामर्श के लिए गृहमंत्रालय भेजा है. अब सबकी निगाहें राष्ट्रपति के फ़ैसले पर टिकी है.

ग़ौरतलब है कि राष्ट्रपति एक बार याक़ूब मेमन की दया याचिका ख़ारिज कर चुके हैं. लेकिन पहली बार याचिका याक़ूब मेमन के भाई ने दी थी, इस बार ख़ुद याक़ूब मेमन ने याचिका भेजी है.

इस बीच याक़ूब की फांसी बरक़रार रखे जाने पर वरिष्ठ वकीलों और क़ानूनी विशेषज्ञों की प्रतिक्रियाएं भी आनी शुरू हो गई हैं.

सुप्रीम कोर्ट के सीनियर एडवोकेट केटीएस तुलसी का कहना है कि जहां तक सुप्रीमकोर्ट का सवाल है, अब याक़ूब की फांसी को कोई नहीं रोक सकता.

अब मामला इस बात पर निर्भर करता है कि राष्ट्रपति इस पर क्या रुख़ एख़्तियार करते हैं.

पूर्व सॉलिसिटर जनरल इंदिरा जयसिंह ने कोर्ट के इस फ़ैसले पर आपत्ति जताई और कहा कि ये फ़ैसला ठीक नहीं है.

उधर मुंबई धमाकों समेत कई मामलों में सरकारी वकील रह चुके उज्ज्वल निकम ने सुप्रीम कोर्ट के इस फ़ैसले का स्वागत किया है.

भारत के पूर्व अटॉर्नी जनरल सोली सोराबजी ने कहा कि वे सुप्रीम कोर्ट के फ़ैसले का आदर करते हैं.

सोरबजी के अनुसार याक़ूब के पास इस सज़ा से बचने के क़ानूनी विकल्प अब ख़त्म हो गए हैं.

मुंबई बम धमाकों के मुख्य जांचकर्ता सुरेश वॉलिशेट्टी ने कहा कि ये फ़ैसला बिल्कुल ठीक है और अदालत ने जांच के सारे पहलुओं का अध्ययन करके और उचित क़ानूनी प्रक्रियाओं के ज़रिए ये फ़ैसला लिया है.

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स्रोत: bbc.com

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