राज्य को इसी साल मिल सकती है महिला नीति

८ अक्‍तूबर, २०१७ १:३१ पूर्वाह्न

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DEHRADUN: उत्तराखंड देश के उन राज्यों में शुमार है, जहां घरेलू अर्थव्यवस्था का पूरा दारोमदार महिलाओं के कंधों पर है। इस पहाड़ी राज्य में महिलाओं के कंधों पर न सिर्फ घर की देखभाल बल्कि खेती- बाड़ी और पशुपालन की भी पूरी जिम्मेदारी है। खेती- बाड़ी के मामले में पुरुषों के जिम्मे खेत जोतने के अलावा कोई खास काम नहीं होता, बाकी सभी काम महिलाएं ही देखती आई हैं। इसके अलावा पिछले कुछ समय में महिला अपराधों का ग्राफ भी तेजी से बढ़ा है। महिलाओं के लिए राज्य में महिला नीति बनाने की मांग की जाती रही है, लेकिन राज्य गठन के क्7 सालों के बाद भी महिला नीति नहीं बन पाई है.

सूत्रों की मानें तो इस बार राज्य सरकार महिला नीति लागू करने को लेकर काफी गंभीर है। राज्य सरकार की ओर से कुछ समय पहले महिला आयोग से महिला नीति का ड्राफ्ट तैयार करने के लिए कहा गया था। सरकार की मंशा को देखते हुए राज्य महिला आयोग ने इस मसले में तेजी से काम शुरू कर दिया है। माना जा रहा है कि महिला आयोग की ओर से ड्राफ्ट मिलने के साथ ही राज्य सरकार इस नीति को लागू करने की प्रक्रिया शुरू कर सकती है.

राज्य महिला आयोग का इरादा इसी महीने राज्य सरकार को महिला नीति का ड्राफ्ट सौंपने का है। फिलहाल महिला आयोग की ओर से महिला कल्याण के क्षेत्र में काम करने वाले एनजीओ, महिला जनप्रतिनिधियों, महिला अधिकारियों और महिला विचारकों सहित समाज के विभिन्न वर्गो के लोगों से सुझाव मांगे हैं.

आयोग का इरादा महिला नीति में महिलाओं के जीवन से जुड़े हर पहलू को शामिल करने का है। इसमें रोजगार, शिक्षा, स्वास्थ्य, सामाजिक स्थिति, महिला अपराध आदि को शामिल करने का है। मुख्य रूप से दूर- दराज की महिलाओं को भी इस नीति में स्थान दिये जाने का इरादा है.

बैठक का इरादा महिला नीति का ड्राफ्ट बनाने से पहले महिलाओं के लिए काम करने वाले एनजीओ, विभिन्न पदों पर काम कर रही महिलाओं के साथ ही विभिन्न क्षेत्रों में उल्लेखनीय काम कर रही महिलाओं की एक बैठक बुलाने का है, ताकि एक प्रभावी महिला नीति का ड्राफ्ट तैयार करने में मदद मिल सके.

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स्रोत: inextlive.jagran.com

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