विश्‍व जनसंख्‍या दिवस: कहीं बढ़ती आबादी के बोझ तले ना दब जाए धरती

११ जुलाई, २०१८ ६:३७ पूर्वाह्न

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विश्‍व जनसंख्‍या दिवस: कहीं बढ़ती आबादी के बोझ तले ना दब जाए धरती

नई दिल्‍ली, जेएनएन। विश्‍व में हर साल 11 जुलाई को 'जनसंख्‍या दिवस' मनाया जाता है। इसका मकसद वातावरण और विकास के संदर्भ में जनसंख्या से जुड़े मुद्दों पर जागरुकता फैलाना है। लेकिन क्‍या इस दिन को मनाने का मकसद पूरा हो रहा है? हर सेकंड बढ़ रही आबादी को लेकर भारत में गंभीर चिंतन क्‍यों नहीं होता? बढ़ती आबादी के कारण प्राकृतिक संसाधन घट रहे हैं, आखिर क्‍या हम सबकुछ खत्‍म होने का इंतजार कर रहे? सिर्फ हम भारत की बात करें तो अगर यहां जनसंख्या की दर कम करने के लिए जल्दी ही कुछ ठोस कदम नहीं उठाए गए तो 2030 तक भारत विश्व का सबसे बड़ी आबादी वाला देश कहलाएगा। अगर ऐसा ही चलता रहा, तो कहीं बढ़ती आबादी के बोझ तले ना दब जाए धरती...!

यह हैरानी की बात है कि करीब चार दशक पहले बढ़ती जनसंख्या तो एक मुद्दा थी, लेकिन आपातकाल में जबरन नसबंदी अभियान के बाद राजनीतिक दलों एवं अन्य नीति-नियंताओं के एजेंडे से यह मसला ऐसे बाहर हुआ कि फिर किसी ने उसकी सुध नहीं ली। क्या यह अजीब नहीं कि 43 साल पहले 1975 में जब भारत की आबादी 55-56 करोड़ थी तब तो बढ़ती जनसंख्या एक गंभीर मसला थी, लेकिन आज जब वह बढ़कर 130 करोड़ से अधिक हो गई है तब कोई भी उसके बारे में न तो चर्चा करता है और न ही चिंता?

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स्रोत: jagran.com

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